देवभूमि की संस्कृति से रूबरू करा रहा नगरासू का होम स्टे
उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता, लोक परंपराएं, पहाड़ी खानपान, संस्कृति और स्वच्छ आवोहवा हमेशा से पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती रही है। चारधाम यात्रा के अलावा अब सालभर यहां पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं राज्य सरकार की होम स्टे योजना भी अब बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार का मजबूत माध्यम बनती जा रही है। सीमांत जनपद चमोली के प्रवेश द्वार पर स्थित कर्णप्रयाग विकासखंड के चौकी गांव के युवा डॉ. देवेश नैनवाल ने अपने हुनर और मेहनत से होम स्टे योजना को नई पहचान दी है।
नगरासू गांव से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित यह होम स्टे पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां आने वाले पर्यटक उत्तराखंड की पारंपरिक संस्कृति, पहाड़ी खानपान और रहन-सहन का अनुभव लेकर लौटते हैं। प्राकृतिक वातावरण और गांव की शांत वादियां पर्यटकों को खासा पसंद आ रही हैं।
होम स्टे संचालक डॉ. देवेश नैनवाल का कहना है कि सरकार युवाओं को स्वरोजगार के लिए सब्सिडी दे रही है, लेकिन उन्होंने अपने होम स्टे को विशेष रूप से ग्रामीण संस्कृति और पारंपरिक खानपान से जोड़कर तैयार किया है, ताकि यहां आने वाले पर्यटक उत्तराखंड की असली पहचान से रूबरू हो सकें।
डॉ. देवेश नैनवाल, संचालक होम स्टे
वही होम स्टे संचालक मंसाराम नैनवाल का कहना है कि हम यहां पर्यटको को घर की साग शब्जी के अलावा यहां के परम्परागत खान पान व ग्रामीण संस्कृति से रूबरू कराते है जिसका पर्यटक यहां खूब आनंद ले रहे है।
बाइट- मंसाराम, मैनेजर होम स्टे
उत्तराखंड में पर्यटन और तीर्थाटन के लिए आने वाले लोग यहां के प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण से काफी प्रभावित नजर आ रहे हैं। कई पर्यटक यहां एक सप्ताह से अधिक समय तक रुकना पसंद कर रहे हैं। पर्यटको का कहना है कि देवभूमि उत्तराखंड में आकर उन्हें स्वर्ग सी अनूभूति होती है,होम स्टे में रहना व खाने का आनंद लग्जरी होटलो से कई गुना ज्यादा सुखद व सकून भरा है।
