September 26, 2022

उत्तराखंड का शांति निकेतन नागनाथ,पर्यटन व तीर्थाटन का बन सकता है बड़ा हब

भानु प्रकाश नेगी।।

चमोली जनपद के दूरस्त क्षेत्र पोखरी ब्लाक में पुस्कर पर्वत पर स्थित नागनाथ भगवान श्रीकृष्ण के भब्य मंदिर,राजगढ़ी की राजराजेश्वरी,व विट्रिस कालीन काठ बंगले रेंज क्वाटर व विद्यालयी शिक्षा के लिए प्रसिद्व है। बांज बरांश,काफल,भमोरा,चीड़,देवदार के मिश्रित वनों से आछादित यह सुरम्य स्थल यहां आने वाले सभी शैलानियों का मन मोह लेता है। 1896 मंे स्थापित एंग्लों इंडियन वर्नाकुलर मीडिल स्कूल पहले पोखरी में चली और 1901 मंे स्कूल भवन नागनाथ में स्थापित होने के बाद यह इसी स्थान (नागनाथ)पर संचालित होने लगा। जिसमें बीस कमरों का हॉस्टल,कीचन,अध्यापक आवास,साइंस लैब,लाईब्रेरी थी। तत्कालीन समय में श्रीनगर गढ़वाल से बद्रीनाथ तक एक मात्र मीडिल स्कूल होने और बांज बुरांस,काफल आदि के वनों से आछादित सुरम्य शांत स्थल होने के कारण वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. योगम्बर सिंह बर्त्वाल ने नागनाथ को उत्तराखंड का शांति निकेतन बताया है।उस समय पौड़ी गढवाल में सिर्फ 3 स्कूल हुआ करते थें उसमें से एक स्कूल नागनाथ में था जिसमें दूसरा कांसखेत और तीसरा पोखड़ा में स्थापित था।नागनाथ का पुराना नाम पुष्कर पर्वत था,यह उडामाण्डा पारतोली से लेकर रेंजक्वाटर,देवस्थान,गुलियालाखाल तक फैला हुआ है।स्कंन्ध पुराण में इसका वर्णन पुष्कर तीर्थ के नाम सें लिखा गया है।चार नागबंसी जो खंसर,लोभा,उर्गम व नागनाथ पोखरी में स्थापित थे,पुराणों के अनुसार त्रेता युग में भगवान श्रीकृष्ण ने नागों का नथ लिया था तो नागों ने भगवान कृष्ण से कहा की हम अब कहां रहेगें,तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि तुम नागपुर में बस जाओ उस क्षेत्र को नाग क्षेत्र के नाम से जाना जायेगा। तब से नाग वंस गढवाल में काफी फैला हुआ है, लेकिन अब विलुप्ती की कगार पर है।


नागनाथ स्कूल में प्रकृति के चितेरे कवि चन्द्रकुवर बर्त्वाल,प्रसिद्व राजनीतिज्ञ नरेन्द्र सिंह भण्डारी इसी स्कूल से पढ़े हुए है। इस स्कूल से पढाई करने वाले अनेक विद्यार्थी द्वितीय विश्व युद्व में कमीशन में भी आ गये थे जिसमंे आलम सिंह बर्त्वाल और प्रवल सिंह मेजर प्रमुख है। इसी स्कूल से पढ़े विद्यार्थी आईएफएस भी बने जिसमें नरेन्द्र सिंहं नेगी एक है। इस स्कूल की खास बात यह थी कि श्रीनगर गढ़वाल और नीती माणा के बीच के विद्याथी भी यहां पढ़ने आते थें।जनपद चमोली बनने के बाद 7 जुलाई 1963 में यह विद्यालय हाईस्कूल बना गया,डॉ.योगम्बर सिह बर्त्वाल हाईस्कूल में प्रवेश करने वाले पहले छात्र थे जिन्हें पहली बार कुर्सी और मेंज में पढाई करने का मौका मिला।सन् 1971 इस विद्यालय को उत्तर प्रदेश के तत्कालीन प्रथम पर्वतीय विकास मंत्री नरेन्द्र सिंह भण्डारी ने इंटरमीडियेट कॉलेज की मान्यता दिलाई।


इस स्थान का बहुत बडा एतिहासिक महत्व है।पोखरी के आस पास रहने वाले जितने भी मूल लोग है वह सब नागबंसी है।क्योंकि नागनाथ नागों की भूमि मानी जाती है। यहां पर पुराने समय में एक नागशिला थी जब चन्द्रकुंवर बर्त्वाल के पिताजी गोपाल सिंह बर्तवाल नागनाथ स्कूल में जब हेड मास्टर हुआ करते थे(1915 सें 1936)उन्होंने हयात असवाल,शिवराज सिंह भण्डारी (विशालगांव) ने मिलकर बनवाया जिसके लिए लैन्सीडाउन से पंचमू सिंह मिस्त्री को परिवार सहित नागनाथ में बुलाया गया। आधा मंदिर निर्माण के बाद पंचमू मित्री की मृत्यु हो गयी थी। तब उसके लड़के ने शेष मंदिर का निमार्ण किया।जिसमें आज तक मेले का आयोजन किया जाता है। नागनाथ की विशेषता है कि यहां पर काफल और भमोरा बहुत होते है।रामभज नाम के राजा इस गढी के राजा होते थे। गढवाल के 52 गढों मे सुमार नागनाथ गढ़ी में मांॅ राजराजेश्वरी का प्रसिद्व मंदिर है। जो 14वीं शताब्दी का माना जाता है।इस मंदिर में सटैना गांव के एक ब्रहामण परिवार को ही पूजा करने का हक है।जिन्हें राजा के समय से ही (14वी शताब्दी)पेंसन मिलती है। इस पेंसन को गोख्याणी राज व बिट्रिस काल में भी बंद नहीं किया गया और अभी तक यह पंेसन उसी परिवार के वारिस को मिलती है।
बिट्रिस काल में पहले पोखरी में लॉक केविन हुआ करता था जहां पर लोहे की खान हुआ करती थी,पोखरी के पास 16 ताम्बे और लोहे की खाने हुआ करती थी। उस यहां पर एक अंग्रेज ऑफिसर आया जो लॉक केविन में ठहरा हुआ था। उस समय अपनी परिवारिक समस्याओं को लेकर अंग्रेज काफी परेसान था तब रडुवा के पास काण्डई का एक सुन्दरमणि नामक एक ब्राहमण था जो जोतिष विद्या का जानकार था।उसने उस अंग्रेज ऑफिसर की समस्या का समाधान किया और बताया कि इस स्थान पर यह लॉक केविन अच्छा नहीं है है इस जगह पर कई वास्तुदोष है। तुम इसे कहीं और बना लों तब अंग्रेज ने यह काठ का बंगला (लॉक केबिन) नागनाथ मंदिर के उपर और गढ़ी के बीच में स्थापित किया।

प्रसिद्व इतिहासकार व वरिष्ठ पत्रकार डॉ योगम्बर सिंह बर्त्वाल के अनुसार इस लॉक केबिन का 1910 में स्टोबर मेनवल में बर्णन है। 1850-60 में यह काठबग्ला बना इसी के साथ यहां पर रेंज क्वाटर भी बनाया गया। उस समय संयोग से रेंजर अवतार सिंह बर्त्वाल और हेड मास्टर भोपाल सिंह वर्त्वाल था।रेंज क्वाटर एक सुरम्य स्थल है। जहां से एक तरफ चौखम्बा,नंदादेवी,त्रिशूल आदि पर्वत श्रृखलायें दिखती है। वहीं दूसरी ओर गौचर समेत अन्य आस-पास के इलाकांे का विहंगम मनोहारी दृष्य देखने को मिलता है। नागनाथ में वन विभाग का ऑफिस होने की वजह से यहां पर मंदिर के निचले हिस्से और रेंज क्वाटर में देवदार,पांगर,बांज,बुरांस,अखरोट और कई जंगली पेडों की नर्सरी बनाई गई है। जिनको समय समय पर आस पास के जंगलों व अन्य स्थानों पर रोपा जाता है।स्कूली छात्र छात्रायें भमोरा,काफल पकनें के समय इन जंगली फलों का खूब रसास्वादन करतें है।इसके साथ ही यहां पर कुछ दसकों पहले सेब,नासपती,आडू,चूली,खुबानी,चेरी आदि काफी मात्रा में पैदा होती थी लेकिन अब पुराने पौघों के लगभग समाप्त होने और इस इलकें में आवास ना के बराबर होने से इन सब फलों की पैदावार नहीं होती है।  यहां के बांज बुरांश के पेड़ों का लगातार दोहन के कारण  जंगलों का क्षेत्रफल लगातार घटता जा रहा है।
कालजयी रचनाकार चन्द्रकुवंर बर्त्वाल ने हिमालय, बांज,बुरांस समेंत कई कविताओं की रचना नागनाथ में पढ़ाई के दौरान यही की थी। उन्होंने अपने अल्प जीवन 28 साल 24 दिन के अनमोल 12 साल इसी क्षेत्र में विताये। गढवाल के प्रसिद्व हास्य व्यंग कवि मुरली दिवान यहां राजगढ़ी में रहने वाले दिवानों के बंसज है,जो देवर गांव में रहते है। जो अपनी हास्य व्यंग की कविताओं के लिए देश प्रदेश के प्रवासियों उत्तराखंडियों में लोेकप्रिय है। नागनाथ इंटर कॉलेज का नाम अब कुछ सालांे पहले उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रथम पर्वतीय विकास, वित्त, वन एवं संसदीय कार्यमंत्री स्व. नरेन्द्र सिंह भण्डारी के नाम पर किया गया है। सरकारी स्कूलों से लगातार लोगों के मोह भंग होने से,वर्तमान समय में राजकीय नागनाथ पोखरी स्कूल में छात्र छात्राओं की संख्या लगातार घटती जा रही है लेकिन अब समग्र शिक्षा अभियान के तहत यहां पर यहां पर अब अटल आर्दश विद्यालय भी खोल दिया गया है। जिसमें हिन्दी और अंग्रेजी माध्यम से पाठ्यक्रम संचालित किया जा रहा है। जिसमें आसपास के अंग्रेजी माध्यम से पढ़ने वाले प्रायवेट स्कूलों की छात्र छात्रायें पढ़ाई कर रहे है।जिससे यहां पर विद्यार्थीयों की संख्या में बडोत्तरी हुई है।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सोशल मीडिया वायरल

error: Content is protected !!