November 3, 2026

आपातकाल स्कूल-कालेज पाठ्यक्रम में किया जाए शामिल:नरेश बंसल।

0
IMG-20240722-WA0020

Emergency should be included in school-college curriculum: Naresh Bansal.

तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वार लगाए आपातकाल से
वर्तमान पीढ़ी को अवगत कराने के लिए अध्याय स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए:डा.नरेश बंसल राज्यसभा सांसद व राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष भाजपा।

आज नई दिल्ली स्थित संसद भवन मे संसद बजट सत्र के पहले दिन सासंद राज्यसभा व भाजपा राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष डा. नरेश बंसल ने शून्यकाल मे एक गंभीर विषय उठाया ।डा. नरेश बंसल ने आपातकाल से संबंधित विषय उठाया।
डा. नरेश बंसल ने सदन के माध्यम से सरकार से मांग कि की वर्तमान पीढ़ी को आपातकाल के दौरान संघर्ष से अवगत कराने के उद्देश्य से देश में व्याप्त परिस्थितियों, दमन और तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा उठाए गए कठोर कदम का विरोध करने के लिए लोकतंत्र सेनानियों के दृढ़ संकल्प पर अध्याय स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए जिसका सदन के बहुत से सदस्यो के समर्थन किया व उससे अपने को ऐसोसिएट किया।

डा.नरेश बंसल ने शून्यकाल मे इस विषय को उठाते हुए कहा कि आपातकाल भारत के लोकतंत्र का काला अध्याय है जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उस समय रक्षक ही भक्षक बन गए थे। आजादी के बाद इसे लोकतंत्र की दूसरी आजादी का भी नाम दिया गया।

डा.नरेश बंसल ने कहा कि इंदिरा गांधी की सरकार द्वारा 1975-77 में आपातकाल ने देश के लोकतंत्र पर कलंक लगाया था।आपातकाल 21 महीने तक चला था, जिसमें नागरिक स्वतंत्रता का हनन, असहमति का दमन और लोकतांत्रिक सिद्धांतों का हनन हुआ था। इसके साथ ही हज़ारों लोगों को बिना कारण बताए जेल में ठूंसा जाने लगा।उन्होनें कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए अनेकों अनेक लोग बलिदान हुए।

डा. नरेश बंसल ने कहा कि आपातकाल का वह स्याह कालखंड लोकतंत्र सेनानियों के लिए एक दुस्वप्न है। आज भी उस दौर को याद कर लोकतंत्र सेनानियों की आंखें नम हो जाती हैं। डा. नरेश बंसल ने जोर देते हुए कहा कि इस समय के पक्ष-विपक्ष के ज्यादातर नेता खुद आपातकाल की ज्यादतियों का शिकार हुए हैं।

डा. नरेश बंसल ने सदन के माध्यम से केंद्र सरकार से मांग कि की देश में 1975-77 में आपातकाल के दौरान की गई ज्यादतियों और दमन का विरोध करने वालों की ओर से की गई लड़ाई को समझाने वाला एक अध्याय स्कूल एवं कॉलेज के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए।

डा. नरेश बंसल ने अपनी मांग मे कहा कि की सभी छात्रों के लिए पाठ्य पुस्तकों में एक पाठ होना चाहिए कि आपातकाल क्या था और इसे कैसे लगाया गया था ?

डा. नरेश बंसल ने कहा कि आपातकाल को अगर सही तरीके से पाठ्यपुस्तकों में स्थान दिया जाए तो लोकतांत्रिक शक्तियों का विकास होगा और प्रजातंत्र की जड़ें मजबूत करने में मदद मिलेगी ।

डा. नरेश बंसल ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आपातकाल लगाकर इंदिरा की सरकार ने भारत के संविधान का गला घोंट दिया था। आज उनके परिवार और उनके पार्टी के लोग संविधान दिखाकर झूठ फैलाने का कार्य कर रहे हैं। कांग्रेस ने जो लोकतंत्र के साथ विश्वासघात किया, उसे कभी भी माफ नहीं किया जा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सोशल मीडिया वायरल