September 27, 2022

आस्था पर प्रहारःरूद्रनाथ मंदिर व धर्मशालाओं में तोड़ फोड,वन विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

भानु प्रकाश नेगी,चमोली

गोपश्वरः करोड़ों हिन्दुओं की आस्था व विश्वास का प्रतीक पंचकेदारो में चतुर्थ केदार भगवान रूद्रनाथ के मंदिर गर्भगृह व धर्मशालाओं में तोड़ फोड़ सें उत्तराखंड समेत सम्पूर्ण देश व विदेश के सनातन धर्मावल्बियों की भावनायें आहत हुई है।उच्च हिमालय क्षेत्र में अति संवेदनसील बुग्यालों व सेंचुरी एरिया में यूं तो यह पांचवी घटना है लेकिन जिस तरह की छति मंदिर,धर्मशालाओं को इस बार हुआ है वह पहले देखा नहीं गया है।


वहीं प्रभागीय वनाधिकारी केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग गोपेश्वर इन्द्र ंिसंह नेगी ने बताया कि,यात्रा शुरू होने से पहले वन विभाग की टीम ने मंदिर के आस पास के क्षेत्र का भ्रमण किया है जहां रूद्रनाथ मंदिर,धर्मशालाओं,व टिन सेड आदि को काफी नुकसान पंहुचा है। उन्होंने कहा कि यह नुकसान मानव जनित है या जानवरों का इसके लिए पुलिस व प्रसाशन को जांच के लिए सूचित किया गया है।रूद्रनाथ एरिया में अभी भी वर्फ के बावजूद वन कर्मचारियों ने गस्त की है। जिसमें यह सब छति देखने को मिली है।


इस घटनाक्रम से आहत भगवान रूद्रनाथ के मुख्य पुजारी हरीश भट्ट का कहना है कि,रूद्रनाथ मंदिर परिसर व गर्भगृह समेंत धर्मशालाओं को छति पंहुचाने में अराजक तत्वों का हाथ भी हो सकता है या तस्कर व विदेशी जासूस भी उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सक्रिय हो सकते है।उन्होंने वन विभाग की कार्य प्रणाली पर सवाल उठाते हुऐ कहा है कि भगवान रूद्रनाथ के एक मात्र मंदिर के साथ-साथ उच्च हिमालयी क्षेत्र में पायी जाने वाली दुर्लभ जड़ी-बुटियों व सेंचुरी एरिया होने के बावजूद भी वन विभाग इस क्षेत्र में सक्रिय भूमिका व देखभाल करने में नाकाम रहा है।इससे पहले एक बार सम्पूर्ण मंदिर एरिया को आग से जलाये जाने की घटना भी घट चुकी है।


उन्होंने शासन व प्रसाशन पर भी सवाल उठाये है कि रूद्रनाथ मंदिर में कई बार इस तरह की घटना होने के बावजूद भी काई ठोस कार्यवाही व सही जांच सामने नहीं आ पायी है,जिससे वह बहुत आहत है।जिस स्थान पर कभी परिंदा भी पर नहीं मार सकता वहां इस तरह की तोड़ फोड़ कैसे संभव हो गई और वो भी तब जब वहां पर बर्फवारी व ठंड के कारण जाना कठिन है। उन्होंने शासन व प्रसाशन से जल्द इसकी जांच कर दोषियों पर सख्त कार्यवाही करने की मांग की है।


आपको बता दे कि,सम्पूर्ण विश्व में चतुर्थ केदार भगवान रूद्रनाथ के मुखमंडल के दिव्य व भव्य दर्शन सिर्फ इसी रूद्रनाथ मंदिर में किये जाते है।महाभारत काल में भी पांडवों को यही से मोक्ष की प्राप्त हुई थी। प्रचीनकाल से ही हजारों ऋषि मुनियों की तपस्थली होने का भी इस स्थान को गौरव प्राप्त है।इस मंदिर के होने से यहां के सैकड़ो स्थानीय लोगों को किसी न किसी रूप में रोजगार मिलता है,लेकिन रूद्रनाथ मंदिर में इस प्रकार की तोड़ फोड़ व छति पंहुचाना उत्तराखंड समेत सम्पूर्ण देश व विदेशों के शिव भक्तों व सनातन धर्म में विश्वास करले वाले लोगां में आक्रोश बड़ता जा रहा है।

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