उत्तराखंड में Sex Ratio बेहतर, बढ़कर 960 पर पहुंचा



देश में जन्म के समय लिंगानुपात की स्थिति में ज्यादा बदलाव नहीं आया है। साल 2019 के जन्म और मृत्यु पंजीकरण के आंकड़ों से एक मिलीजुली तस्वीर सामने आई है। अच्छी खबर ये है कि जिस राज्य या केंद्र शासित प्रदेश का डेटा उपलब्ध है, वहां किसी में भी एसआरबी 900 से कम नहीं है। अधिकांश राज्यों में जहां 2018 या 2017 की तुलना में कम अनुपात दर्ज था वहां सुधार दिख रहा है। जिसमें तेलंगाना ने 915 से 953 तक सबसे बड़ा सुधार दर्ज किया है। इसके बाद उत्तराखंड का नंबर है, जहां एसआरबी 929 से बढ़कर 960 हो गया है।

उत्तराखंड उन कुछ राज्यों में से एक है जहां 2017 में पहले से ही कम अनुपात 929 था, जो दो साल बाद तेजी से बढ़कर 960 हो गया है। ये डेटा 2019 के लिए सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम की सालाना रिपोर्ट से है। विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि जन्म के समय प्राकृतिक लिंगानुपात प्रति 1,000 पुरुषों पर लगभग 952 महिलाओं का है।
वहीं छत्तीसगढ़ जो एक आदिवासी राज्य है उसने एसआरबी में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की है। 2017 में जहां एसआरबी 968 था, तो वहीं 2019 में ये 931 रहा। इसके अलावा दिल्ली के लिए डेटा 2019 के लिए उपलब्ध नहीं था, हालांकि 2017 और 2018 के बीच सुधार दिखा है। जबकि पूर्वोत्तर के तीन राज्यों समेत छह राज्य हैं, जहां एसआरबी 952 से अधिक है। अरुणाचल प्रदेश में 1,024 का सबसे ज्यादा अनुपात था।

