गौचर मेला सम्पन्न: सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का बना साक्षी।
73वें राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक गौचर मेले का बुधवार को रंगारंग कार्यक्रमों के साथ भव्य समापन हो गया। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बद्रीनाथ विधानसभा के विधायक लखपत बुटोला शामिल हुए। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर औपचारिक रूप से कार्यक्रम की शुरुआत की।
मेले के सफल संचालन पर मेलाध्यक्ष एवं एसडीएम कर्णप्रयाग सोहन रांगण ने मेला समिति, प्रशासनिक अधिकारियों, स्थानीय संगठनों और सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभी विभागों और स्थानीय जनता के सहयोग से इस वर्ष मेला उत्कृष्ट रूप से संपन्न हुआ।
मुख्य अतिथि विधायक लखपत बुटोला ने अपने संबोधन में गौचर मेले को ऐतिहासिक और सामाजिक-सांस्कृतिक मिलन का केंद्र बताते हुए कहा कि यह मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में प्रेम, सौहार्द और भाईचारे की भावना और प्रबल होती है।
मेले के आकर्षण में इस बार श्री नंदादेवी राजजात यात्रा का जानकारीपूर्ण स्टॉल और परम्परागत काष्ठ कला का प्रदर्शन विशेष रूप से चर्चाओं में रहा।
नंदा राजजात यात्रा के प्रमुख पड़ाव सुतोल गांव से आए पदयात्री रणजीत सिंह नेगी ने बताया कि स्टॉल के माध्यम से मेले में आए लोगों को आगामी श्री नंदादेवी राजजात यात्रा की महत्वपूर्ण जानकारियाँ और पिछली यात्राओं का इतिहास उपलब्ध कराया गया।
वहीं काष्ठ कला के स्टेट अवॉर्डी दर्शन लाल बैनोला ने कहा कि यह मंच लोगों को पारंपरिक काष्ठ कला से परिचित कराने का सुनहरा अवसर रहा। उन्होंने उत्तराखंड की इस प्राचीन कला को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन और राज्य सरकार के सहयोग के प्रति आभार जताया।
मेले में विभिन्न विभागों के स्टॉल, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ, स्थानीय उत्पादों की बिक्री और क्षेत्रीय कलाकारों के प्रदर्शन ने कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा। तेरह दिन से चल रहे इस मेले ने एक बार फिर गौचर को सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र बना दिया।
