डायट गौचर में कौशलम् कार्यक्रम का शुभारंभ, 150 शिक्षक ले रहे प्रशिक्षण






सरकारी विद्यालयों में शिक्षा को व्यवहारिक और रोजगारपरक बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से लगातार नए प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ कौशल और उद्यमिता से जोड़ने के उद्देश्य से कौशलम् कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में चमोली जिले के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान यानी डायट गौचर में राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के 150 शिक्षक-शिक्षिकाओं के लिए तीन दिवसीय कौशलम् कार्यशाला का आयोजन किया गया।कार्यक्रम के दौरान डायट गौचर ने एक विशेष पहल की शुरुआत करते हुए जनपद की विशिष्ट विभूतियों को सम्मानित करने और उनके अनुभवों से विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को प्रेरित करने के लिए व्याख्यानमाला की परंपरा भी शुरू की। इसी कड़ी में प्रसिद्ध लोकगायक किशन महिपाल बतौर विशिष्ट अतिथि कार्यक्रम में पहुंचे। मुख्य शिक्षा अधिकारी चमोली आकाश सारस्वत ने उनका स्वागत किया। इस दौरान किशन महिपाल ने अपने जीवन संघर्ष और सफलता की प्रेरक कहानी साझा करने के साथ ही लोकगीत भी प्रस्तुत किए।
मुख्य शिक्षा अधिकारी आकाश सारस्वत ने बताया कि कौशलम् कार्यक्रम जनपद के सभी माध्यमिक विद्यालयों में शुरू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में उद्यमशीलता की भावना विकसित करना है, ताकि वे भविष्य में रोजगार तलाशने के साथ-साथ स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में भी आगे बढ़ सकें।

आकाश सारस्वत, मुख्य शिक्षा अधिकारी, चमोली
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे लोकगायक किशन महिपाल ने डायट की इस पहल को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के साथ-साथ जनपद की विशिष्ट प्रतिभाओं और विभूतियों को सम्मानित कर उनके अनुभवों से नई पीढ़ी को प्रेरणा देना एक अच्छी पहल है।
– लोककिशन महिपाल, लोकगायक
कौशलम् कार्यक्रम के जिला समन्वयक तेजेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं को रोजगार के लिए दूसरे प्रदेशों की ओर पलायन करना पड़ता है। कौशलम् कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों में उद्यमशील मानसिकता विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे भविष्य में रोजगार के अवसर पैदा करने वाले बन सकें।
तीन दिवसीय प्रशिक्षण में शामिल शिक्षक-शिक्षिकाएं भी कार्यक्रम को लेकर उत्साहित नजर आए। प्रशिक्षु ललित मोहन जोशी ने कहा कि प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें 21वीं सदी के आवश्यक कौशलों की जानकारी मिलेगी, जिसे वे विद्यार्थियों तक पहुंचाकर उनमें कौशल और उद्यमशीलता का विकास कर सकेंगे।
