भालू के बढ़ते आतंक के बीच विद्यालय समय बदलने की मांग, ग्रामीणों ने जताई चिंता






भालू के बढ़ते आतंक के बीच विद्यालय समय बदलने की मांग, ग्रामीणों ने जताई चिंता
चमोली। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढ़ रहे भालू के आतंक के बीच अब स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि सुबह के समय जंगल के रास्तों से विद्यालय आने-जाने वाले बच्चों पर भालू के हमले का खतरा बना हुआ है। ऐसे में छात्र हित को देखते हुए विद्यालयों के समय में परिवर्तन किया जाना जरूरी है।
ग्रामीणों के अनुसार बुधवार को दुग्धखम्बेश्वरी देवी मंदिर के नीचे स्थित जंगल में गुनियाला खाल से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर गांव की महिलाओं ने तीन भालुओं को देखा। इनमें दो भालू के बच्चे बताए जा रहे हैं। भालुओं की मौजूदगी की सूचना के बाद आसपास के ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
ग्रामीणों का कहना है कि सर्दियों के दौरान भालुओं का बस्तियों की ओर आना बढ़ जाता है और पूर्व में भालू के हमलों की घटनाएं भी सामने आती रही हैं। ऐसे में सुबह के समय जंगल के रास्तों से विद्यालय जाने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।

ग्रामीणों के मुताबिक कई विद्यालयों में बच्चे सुबह करीब 6:30 से 7:00 बजे के बीच घरों से निकलकर जंगल के रास्तों से विद्यालय पहुंचते हैं। वहीं सुबह करीब 6 बजे तक कई इलाकों में पर्याप्त रोशनी नहीं होती। ऐसे में वन्यजीवों की मौजूदगी बच्चों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि किसी अप्रिय घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय प्रशासन और शिक्षा विभाग को पहले से ही एहतियाती कदम उठाने चाहिए। कुछ वर्ष पूर्व भी एक सितंबर से विद्यालयों के समय में परिवर्तन कर सुबह 9:30 बजे से शाम 3:30 बजे अथवा सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक विद्यालय संचालित किए जाने का निर्णय छात्र हित में प्रभावी रहा था।
ग्रामीणों ने छात्र हित और सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए भालू प्रभावित क्षेत्रों में विद्यालयों के समय में आवश्यक परिवर्तन करने तथा वन विभाग द्वारा संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने की मांग की है।
