संस्कृत विषयिणी धारणा के अपाकरण हेतु संस्कृत को व्यवहार में लाना आवश्यक




डालनवाला, देहरादून,
संस्कृतभारती देहरादून एवं शिवमंदिर प्रबन्धन समिति, चन्द्रमार्ग, डालानवाला के संयुक्त तत्वावधान में संस्कृत सप्ताह के उपलक्ष्य में “समाजे संस्कृतविषयीणी धारणा” विषयक एक विचारगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। इस संवाद-गोष्ठी में विद्वानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, संस्कृत प्रेमियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं विभाग संयोजक नागेंद्र दत्त व्यास ने अपने उद्बोधन में कहा कि —
“यदि हमें अपनी संस्कृति, अपने इतिहास और अपने वास्तविक मूल्यों को जानना है, तो संस्कृत को केवल पाठ्यक्रम की भाषा न मानकर व्यवहार में लाना होगा।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि संस्कृत को बोलचाल में लाने से ही समाज में इसके प्रति बनी हुई संकीर्ण धारणा का अपाकरण संभव है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि संस्कृत भाषा केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि भविष्य की भी मजबूत आधारशिला है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. राम भूषण विजल्वाण ने कहा कि संस्कृत भगवान से संवाद करने का माध्यम है। “शब्दो वै ब्रह्म” का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि शब्द ही सृष्टि का मूल हैं, और संस्कृत में निहित सुभाषित जीवन के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शक सिद्ध होते हैं। उन्होंने उपस्थित जनों से आह्वान किया कि वे इन सुभाषितों के व्यावहारिक महत्त्व को समझें और संस्कृत अध्ययन की ओर अग्रसर हों।

प्रेरणास्रोत एवं उत्तराखण्ड विद्वत् सभा के अध्यक्ष आचार्य विजेंद्र प्रसाद ममगाईं ने अपने संबोधन में कहा कि संस्कृत केवल पूजा-पाठ और कर्मकांड की भाषा नहीं है, बल्कि यह ऋषियों, मुनियों और कवियों द्वारा विकसित एक अनुपम, सुंदर एवं बहुआयामी शोध-भाषा है। उन्होंने इसे विज्ञान, साहित्य, दर्शन और नीति-शास्त्र जैसे सभी क्षेत्रों में सर्वोपयोगी बताया।
कार्यक्रम के संयोजक एवं नगर पार्षद रबिन्द्र त्यागी ने सभी अतिथियों, विद्वानों एवं सहभागीजन का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के सहयोगीगण में पूर्व पार्षद आनन्द त्यागी, आचार्य श्रीकान्त शुक्ला, प्रवीण त्यागी, अकबर सिंह नेगी, राजीव शर्मा, किशोर सुमुन्दली आदि शामिल रहे।
जनपद मंत्री डॉ. प्रदीप सेमवाल ने संस्कृतभारती देहरादून की ओर से सभी संस्कृत प्रेमियों, विद्वानों एवं आमजन से अनुरोध किया कि वे इस आयोजन में सम्मिलित होकर संस्कृत भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के इस अभियान में योगदान दें।
कार्यक्रम का मंच संचालन धीरज मैठाणी ने किया, जबकि शुभारंभ में सहसपुर खंड के पूर्व संयोजक धीरज बिष्ट ने गीत प्रस्तुत किया। पूर्व विस्तारक विशाल प्रसाद भट्ट ने अपनी स्वरचित कविता का मनोहारी पाठ कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। सभी ने उद्घोषक वाक्यों संस्कृत का डिंडिमनाद किया।
मंदिर के पूजक श्रीकांत शर्मा, विजय कुमार गुप्ता, नन्दकिशोर वर्मा, प्रताप सिंह, राम अंचल, महेंद्र, सुशील कुमार, निशांत सहित स्थानीय गणमान्य नागरिक और रायपुर खंड संयोजक सह-खंड संयोजिका डॉ. बीना पुरोहित, नीतीश मैठाणी, छात्र संयोजिका सुश्री कनिका भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।

