वन मंत्री सुबोध उनियाल पर वन पंचायतों की उपेक्षा का आरोप
प्रदेशभर के वन पंचायत सरपंचों ने राज्य सरकार और वन विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सरपंच संगठन का आरोप है कि सुबोध उनियाल के नेतृत्व में वन विभाग की नीतियों से उत्तराखंड में वन पंचायत व्यवस्था समाप्ति के कगार पर पहुंच गई है।
“सरपंचों को गुलाम समझा जा रहा” – संगठन
वन पंचायत सरपंचों का कहना है कि उन्हें मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं। कागजी कार्यवाही के लिए आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध नहीं हैं। अग्निकाल के दौरान भी उनकी उपेक्षा की जाती है, जबकि जमीनी स्तर पर वन पंचायत सरपंच ही अपनी वन पंचायतों के साथ-साथ आरक्षित वन क्षेत्रों को भी आग से बचाने में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप
सरपंच संगठन का आरोप है कि वन विभाग ग्राम सभाओं को तो प्रोत्साहित कर रहा है, लेकिन वास्तविक कार्य करने वाले वन पंचायत प्रतिनिधियों की लगातार अनदेखी की जा रही है। इससे सरपंचों में भारी रोष व्याप्त है।
प्रदेशव्यापी त्यागपत्र देने की चेतावनी
विरोध स्वरूप वन पंचायत सरपंच संगठन ने ऐलान किया है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो सम्पूर्ण उत्तराखंड में सरपंच अपने-अपने विकासखंड स्तर से वन एवं राजस्व विभाग को सामूहिक त्यागपत्र सौंपेंगे।
सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस मामले में अभी तक वन विभाग या सरकार की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यदि प्रदेशभर में सरपंच सामूहिक रूप से इस्तीफा देते हैं तो इसका सीधा असर वन प्रबंधन और अग्नि नियंत्रण व्यवस्था पर पड़ सकता है।
