दूसरे को आनंदित देखने से आत्मा का फैलाव होता है:आचार्य मंमगाई।




दूसरे को आनंद देने से आत्मा का विकास होता है ,वास्तव में दूसरे को आनंद देनें से आप बड़े हो जाते हो। वास्तव में दूसरे को आनंदित देखना भी आत्मा का फैलाव है । किसी के घर में परेशानी से आप दुखी तो हो पाते हैं लेकिन बगल में किसी नें महल भी खड़ा कर दिया तो तभी आप दुखी हो जाते हैं जबकि महल बननें पर सुखी होना चाहिए उक्त विचार भण्डार गाँव खाड़ी टिहरी गढ़वाल में कोठियाल परिवार के द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के समापन दिवस पर ज्योतिष्पीठ व्यास आचार्य शिवप्रसाद मंमगाई नें व्यक्त करते हुए कहा किसी की सुख प्राप्ति पर सुखी होना एक आत्मिक फैलाव है। आनंद देनें से चेतना का विस्तार होता है और जब चेतना का विस्तार होता है तो परमात्मा से चेतना लेने का आयात बढ़ जाता है। जितना आयात है आपके पास उतना ही परमात्मा की कृपा की वर्षा होती है। आप पर ब्रह्म आनन्द का विस्तार है उसके लिए सत्पात्र चाहिए ।

दत्तात्रेय प्रसंग पर बोलते हुए आचार्य मंमगाई ने कहा 24 गुरू बनाये सीख सबसे लेनी चाहिए । यह भाव व भक्ति हमको एकाग्रता के सूत्र में बांधती है । कथा में पधारे प्रसंगों पर नें सूदूर क्षेत्रों से आये लोगों को भावविभोर कर दिया ।
वहीं कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल नें अपनें सम्बोधन में नईं पीड़ी को अपनी संस्कृती का ज्ञान देनें के लिए इस प्रकार के आयोजनों की आवश्यकता है । वहीं विरेन्द्र दत्त उनियाल नें गीता के माध्यम से संस्कारित होनें पर बल दिया। आयोजकों के द्वारा विशाल भण्डारे का आयोजन किया गया। विशेष रूप से उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, नरेन्द्र नगर ब्लाक प्रमुख राजेन्द्र भण्डारी, कांग्रेस दिल्ली प्रदेश के पूर्व विधायक वर्तमान मसूरी के प्रभारी सुरेश गुप्ता, भवानी दत्त कोठियाल, राजेन्द्र कोठियाल, राकेश कोठियाल, प्रमोद नौटियाल, हितेश जोशी, गुड्डी देवी, बीना, अनिता, चन्द्रमणि डबराल, बालकिशन भट्ट, वीरेंद्र उनियाल, दिनेश नौटियाल, श्रेया सृष्टि आचार्य, संदीप बहुगुणा, आचार्य द्वारिका नौटियाल, आचार्य प्रदीप नौटियाल आचार्य, प्रकाश बहुगुणा सुरेश जोशी, आदि भक्त गण भारी संख्या में उपस्थित थे।

