85 वर्षीय कल्पेश्वरी देवी ने हरेला पर्व पर विधानसभा भराड़ीसैंण परिसर में किया वृक्षारोपण, दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
वीर चक्र विजेता स्व. देव सिंह भंडारी की धर्मपत्नी ने फलदार पौधा लगाकर नई पीढ़ी को किया प्रेरित
भराड़ीसैंण (गैरसैंण)/चमोली।
उत्तराखंड के लोकपर्व हरेला के अवसर पर विधानसभा परिसर भराड़ीसैंण (गैरसैंण) में एक प्रेरणादायी दृश्य देखने को मिला। चमोली जनपद की पोखरी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत रानौ (वर्तमान निवास गौचर) की निवासी तथा वीर चक्र विजेता स्वर्गीय देव सिंह भंडारी की धर्मपत्नी कल्पेश्वरी देवी (85 वर्ष) ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए विधानसभा परिसर में स्वयं फलदार पौधे का रोपण किया।
जानकारी के अनुसार कल्पेश्वरी देवी अपने परिवार के साथ हरेला पर्व के अवसर पर विधानसभा परिसर पहुंची थीं। इस दौरान उन्होंने उद्यान विभाग के कर्मचारियों को फलदार पौधे लगाते हुए देखा। पर्यावरण के प्रति अपने लगाव को देखते हुए उन्होंने भी एक पौधा लगाने की इच्छा व्यक्त की। उनकी इस भावना से उद्यान विभाग के कर्मचारी अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्हें पौधा उपलब्ध कराया। इसके बाद कल्पेश्वरी देवी ने पूरे उत्साह के साथ पौधारोपण कर हरेला पर्व का संदेश दिया।
85 वर्ष की आयु में उनका यह प्रयास उपस्थित लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना। सभी ने उनकी पर्यावरण के प्रति जागरूकता और उत्साह की सराहना की। उपस्थित लोगों ने कहा कि यदि समाज का प्रत्येक व्यक्ति हरेला जैसे पर्वों पर कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प ले, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।
कल्पेश्वरी देवी ने इस अवसर पर कहा कि पेड़-पौधे जीवन का आधार हैं। आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वातावरण देने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को पौधारोपण के साथ-साथ उनकी नियमित देखभाल भी करनी चाहिए। उन्होंने हरेला पर्व की शुभकामनाएं देते हुए सभी से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने का आह्वान किया।
गौरतलब है कि हरेला पर्व उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, प्रकृति संरक्षण और हरियाली का प्रतीक माना जाता है। इस पर्व पर प्रदेशभर में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। वीर चक्र विजेता के परिवार की ओर से किया गया यह पौधारोपण पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ देशभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी का भी प्रेरक संदेश देता है।
