February 2, 2026

दून विश्वविद्यालय में धूम-धाम से मनाया गया जनजातीय गौरव दिवस

 

 

देहरादून: दून विश्वविद्यालय में सामाजिक विज्ञान संकाय के अंतर्गत मानवशास्त्र विभाग एवं डॉ. अंबेडकर पीठ द्वारा जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर एक बहुविषयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम भारत की जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक एवं बौद्धिक विरासत के सम्मान को समर्पित था।

पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता

कार्यक्रम की शुरुआत पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता से हुई, जिसमें मानवशास्त्र विभाग एवं MSW कार्यक्रम के 20 विद्यार्थियों ने प्रतिभाग किया। प्रस्तुत पोस्टर निम्न विषयों पर आधारित रहे—

जनजातीय समाज: भारतीय समाज का अभिन्न अंग

स्वतंत्रता संग्राम में जनजातीय समाज एवं नेताओं की भूमिका

जनजातीय ज्ञान पद्धति

जनजातीय जीवन का सांस्कृतिक पक्ष

प्रतियोगिता के परिणाम:

प्रथम पुरस्कार: महक असवाल

द्वितीय पुरस्कार: दीपिका रावत

तृतीय पुरस्कार: [नाम प्रविष्ट करें]

चतुर्थ पुरस्कार: अनुष्का रावत

डॉक्यूमेंट्री स्क्रीनिंग

इसके बाद विद्यार्थियों द्वारा निर्मित राजी जनजाति, उत्तराखंड पर आधारित डॉक्यूमेंट्री प्रदर्शित की गई, जिसमें इस जनजाति की सांस्कृतिक परंपराओं और जीवनशैली का प्रभावशाली व तथ्यपूर्ण चित्रण किया गया।

संवाद सत्र

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा विशेष संवाद सत्र “संवाद”, जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे—
डॉ. के. आर. नौटियाल, पूर्व अतिरिक्त महानिदेशक, भारतीय तटरक्षक बल (PTM, TM), रक्षा विशेषज्ञ एवं मानवशास्त्री।
सत्र में जनजातीय पहचान, रणनीतिक ज्ञान प्रणाली और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।

अतिथियों की उपस्थिति

कार्यक्रम में डॉ. अंकित नगर (सहायक प्रोफेसर, अर्थशास्त्र) तथा डॉ. अशुतोष पांडेय (MSW कार्यक्रम) ने शिरकत की और विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की।
साथ ही, डॉ. एन. के. गर्ग एवं डॉ. डी. कुमार ने विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई जनजातीय चित्रकृतियों का मूल्यांकन किया।

समन्वय और समापन

कार्यक्रम का सफल समन्वयन डॉ. सौम्यता पांडेय, मानवशास्त्र विभाग, द्वारा किया गया।
समापन सत्र में डॉ. मानवेंद्र सिंह बर्त्वाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए अतिथियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

यह आयोजन दून विश्वविद्यालय की समावेशी शिक्षा, सांस्कृतिक विविधता तथा जनजातीय समुदायों के सम्मान और संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ करता है।

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