ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना बनेगी हरित विकास का राष्ट्रीय मॉडल
देहरादून। उत्तराखंड की महत्वाकांक्षी ऋषिकेश–कर्णप्रयाग ब्रॉडगेज रेल परियोजना केवल रेल संपर्क तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का भी राष्ट्रीय उदाहरण बनेगी। रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) द्वारा तैयार की गई परियोजना में हरित ऊर्जा, जल संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और स्थानीय रोजगार को विशेष महत्व दिया गया है।

परियोजना के तहत विकसित किए जा रहे सभी 11 रेलवे स्टेशनों का निर्माण भारतीय ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (IGBC) के मानकों के अनुरूप किया जा रहा है। स्टेशनों की छतों पर सोलर पावर प्लांट लगाए जाएंगे, जिससे स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा और बिजली की आवश्यकता का बड़ा हिस्सा सौर ऊर्जा से पूरा किया जा सकेगा।
परियोजना में वर्षा जल संचयन, रिचार्ज पिट, रिचार्ज तालाब और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं। साथ ही निर्माण एवं संचालन के दौरान ‘नेट जीरो वेस्ट’ की अवधारणा अपनाते हुए अपशिष्ट के पुनर्चक्रण और वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था भी की गई है।
पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए परियोजना क्षेत्र में 10 लाख से अधिक स्थानीय एवं फलदार पौधों का रोपण किया जाएगा। इसके अलावा कृत्रिम आर्द्रभूमि (कंस्ट्रक्टेड वेटलैंड) विकसित कर प्राकृतिक जल स्रोतों और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाया जाएगा।
सुरंग निर्माण से निकलने वाले मलबे का वैज्ञानिक ढंग से निस्तारण कर डंपिंग यार्डों को हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। वहीं रेलवे की उपलब्ध भूमि पर बागवानी, मधुमक्खी पालन, पौधशालाएं और स्थानीय उत्पादों के लिए ईको-फ्रेंडली मार्केट विकसित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
परियोजना के विभिन्न एडिट पोर्टलों पर भविष्य में ध्यान केंद्र (मेडिटेशन रिट्रीट), प्रकृति संरक्षण एवं सूचना केंद्र भी विकसित किए जाने की योजना है, जिससे क्षेत्र में पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
आरवीएनएल का कहना है कि ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना आधुनिक इंजीनियरिंग, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व का संतुलित उदाहरण है। यह परियोजना उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए हरित एवं सतत आधारभूत संरचना का एक प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभरेगी।
