रंगारंग कार्यक्रमों के साथ रडुवा चांदनीखाल विद्यालय का वार्षिकोत्सव सम्पन्न


रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पीएमश्री अटल उत्कृष्ट विद्यालय, राजकीय इंटर कॉलेज रडुवा चांदनीखाल का वार्षिकोत्सव एवं पूर्व छात्र-छात्रा सम्मान समारोह भव्य रूप से सम्पन्न हुआ।
पोखरी विकासखंड के पीएमश्री अटल उत्कृष्ट विद्यालय, राजकीय इंटर कॉलेज रडुवा चांदनीखाल में प्रधानाचार्य संजय कुमार के नेतृत्व में वार्षिकोत्सव एवं पूर्व छात्र-छात्राओं के सम्मान समारोह का आयोजन धूमधाम से किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि जिला पंचायत उपाध्यक्ष लक्ष्मण खत्री एवं विशिष्ट अतिथि मुख्य शिक्षा अधिकारी चमोली आकाश सारस्वत द्वारा सरस्वती चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया।
मुख्य अतिथि लक्ष्मण खत्री ने अपने संबोधन में कहा कि छात्र-छात्राओं के जीवन में शिक्षा के साथ अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का विशेष महत्व है। इन्हीं मूल्यों के आधार पर विद्यार्थी भविष्य में उच्च पदों पर आसीन होकर समाज और देश की सेवा कर सकते हैं।
विशिष्ट अतिथि आकाश सारस्वत ने विद्यार्थियों को पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह देते हुए कहा कि माध्यमिक शिक्षा के वर्ष उनके जीवन की दिशा तय करते हैं। उन्होंने समय की पाबंदी, अनुशासन और स्वाध्याय को सफलता की कुंजी बताते हुए नशामुक्ति पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि शराब परिवार और समाज के लिए हानिकारक है और इसमें माताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। साथ ही अभिभावकों से बच्चों की शैक्षिक प्रगति पर नियमित नजर रखने की अपील की।
कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने सरस्वती वंदना “वर दे वीणा वादिनी” एवं स्वागत गीत “आनंद मंगलम शुभ स्वागतम” से शुरुआत की। इसके बाद राजस्थानी लोक नृत्य, योग एवं आनंद कार्यक्रम, बुढ़ देवता, जीतू बगड़वाल नृत्य तथा जौनसारी “मासो देवता की डोली” जैसी प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया और उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक प्रस्तुत की।
इस अवसर पर विद्यालय के पूर्व छात्र-छात्राओं तथा बोर्ड एवं गृह परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि द्वारा मोमेंटो और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में प्रधानाचार्य संजय कुमार सहित विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्य, शिक्षक-शिक्षिकाएं, जनप्रतिनिधि, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन मनमोहन परमार एवं दुर्गा प्रसाद कुमेड़ी ने संयुक्त रूप से किया।
