August 29, 2025

हिमालय दिवस के अवसर पर जीआईसी गोदली ने प्रस्तुत किये जनपद में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम

पोखरी: हिमालय दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम जीआईसी गोदली के सहयोग से चमोली के विभिन्न क्षेत्रों में सांस्कृतिक व व्यावहारिक गतिविधियों के द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए गए । जिसमें अपनी प्रकृति रुपी विचारो को समाज के अन्य हिस्सों तक किस प्रकार से पहुंचाए जाय । प्रत्येक विचारधारा हिमालय से जुड़नी चाहिए ।
हिमालय दिवस अभियान में एक विचार पहाड़ की करें तो जहां सबसे ज्यादा असर पहाड़ से पलायन का ही हुवा । कहा जाता है कि पर्वतों में सबसे युवा पर्वत हिमालय ही है । लेकिन अपने बड़े बुजुर्गो से जो सत्यता सुनने को मिली । हमने तो पहाड़ ऐसा ही देखा ? हां थोड़ा परिर्वतन रहन सहन , खान पान में ज्यादा ही हो गया । अब अपने अपनों को कम पहचानते हैं । इन आगनो में कभी क्या रौनक रहतीं थीं ? सुनाने को तो बहुत कुछ है । पर हमारी कोई सुनता नहीं ? हममे जो हैं भी उसे सुनाई नहीं देता ।

आज ढूंढ कर भी लोग नहीं मिलते अब वीरान से लगता है जीवन । जिसे हमने संवारा जिसे बनाया , पढ़ लिख कर परदेशी हो गए, इन आंगनो से अब कोई बुढ़ा होगा ? अपने साथ अपनी बुढ़ापा को भी हम लेकर जाएं । नहीं लगता भविष्य में कभी इन आंगनो से फिर कोई बुड्डा होगा । पहाड़ में जिस प्रकार की प्राकृतिक आपदाएं आ रही है पता नहीं किसकी नज़र लग गई । इन पहाड़ो पर जब हम जवान थे हम लोग प्रकृति के उपासक थे । बहुत ख्याल रखते थे प्रकृति रुपी नदी, पेड़ पौधों, जीव जंतु, जंगली जानवरों, जड़ी बूटियों का पूरा ध्यान रखते थे । अपनापन था प्रकृति से और प्रकृति प्रेमी थे हम । आओ एक संकल्प लें हिमालय के प्रति संवेदनशीलता जरूर रखें । जब भी जाना हिमालय की ओर तब कोई कचरा न ले जाना । यदि प्यारी है ये धरा तो इसे स्वच्छ जरुर बनाना ।

पेड़ वाले गुरुजी ।

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