August 6, 2026

तीर्थ विधान परिषद की बैठक में बद्री-केदार मंदिरों की परंपराओं और अधिकारों की रक्षा पर जोर

 

 

तीर्थ विधान परिषद की बैठक में बद्री-केदार मंदिरों की परंपराओं और अधिकारों की रक्षा पर जोर

 

देहरादून। तीर्थ विधान परिषद की बैठक ठाकुर भवानी प्रताप सिंह पंवार की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में बद्री विशाल, केदारनाथ तथा अन्य 85 मंदिरों की ऐतिहासिक पहचान, मान-मर्यादाओं और परंपराओं को संरक्षित रखते हुए कार्य किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया गया।

 

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि तीर्थ विधान का संचालन वर्ष 1924 के अधिनियम के अनुरूप किया जाना चाहिए तथा बद्री-केदार मंदिरों के अंतर्गत संचालित विकास कार्यों में प्राचीन रीति-रिवाजों और धार्मिक परंपराओं का विशेष ध्यान रखा जाना आवश्यक है।

 

परिषद ने सरकार से राजपरिवार तथा स्थानीय हक-हकूक धारकों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। साथ ही स्थानीय लोगों को मंदिर दर्शन और धर्मशालाओं में प्राथमिकता देने की आवश्यकता भी बताई गई।

 

बैठक में गढ़वाल राजवंश की पारंपरिक अधिकार व्यवस्था, पंवार राजाओं द्वारा संपादित धार्मिक अनुष्ठानों तथा आगामी हरिद्वार कुंभ में सहभागिता को लेकर भी चर्चा की गई। इसके अलावा गढ़वाल एवं कुमाऊं क्षेत्र के पंवार और चंद्र शासकों द्वारा निर्मित मंदिरों, महलों तथा ऐतिहासिक इमारतों के स्थापत्य, इतिहास और संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

 

परिषद ने उन प्राचीन मंदिर समूहों के संबंध में भी चिंता व्यक्त की जो वर्तमान में वन विभाग के अधिकार क्षेत्र में आ गए हैं। बैठक में सुझाव दिया गया कि ऐसे मंदिरों की परंपराओं, धार्मिक गतिविधियों और पारंपरिक अधिकार क्षेत्रों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए।

 

बैठक में प्रवीण मंमगाई, प्रीतम पंवार, आनंद सिंह पंवार, नरेंद्र सिंह रौथाण, आचार्य कृष्णानंद नौटियाल, डॉ. मानवेंद्र सिंह बर्त्वाल, बिजेंद्र सिंह नेगी, संदीप खत्री, अशोक पंवार, राजीव पंवार और धीरेन्द्र सिंह बर्त्वाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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