कार्तिक स्वामी धाम में निकली 101 कलशों की भव्य यात्रा, भक्तिमय माहौल में गूंजे जयकारे
रुद्रप्रयाग/चमोली। देवभूमि उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में क्रौंच पर्वत की पुण्य शिखाओं पर स्थित भगवान कार्तिक स्वामी धाम इन दिनों भक्ति और आस्था का केंद्र बना हुआ है। उत्तर भारत के एकमात्र कार्तिक स्वामी मंदिर में आयोजित 11 दिवसीय महायज्ञ एवं धार्मिक अनुष्ठान के तहत रविवार को 101 पवित्र जल कलशों की भव्य यात्रा निकाली गई।
दुर्गम पर्वतीय पगडंडियों और विशाल चट्टानों के बीच से निकली इस कलश यात्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। भगवान कार्तिकेय के जयघोषों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा और वातावरण भक्तिमय हो गया। परंपरा के अनुसार इस विशेष जल कलश यात्रा में केवल पुरुष श्रद्धालु ही शामिल हुए।
रुद्रप्रयाग और चमोली जनपद की सीमाओं के मध्य स्थित भगवान कार्तिक स्वामी धाम 362 गांवों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ और आषाढ़ मास की संधि बेला में आयोजित होने वाला यह धार्मिक अनुष्ठान क्षेत्र की प्राचीन लोक परंपराओं और सनातन संस्कृति का जीवंत प्रतीक है।
इन दिनों देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु भगवान कार्तिकेय के दर्शन के लिए धाम पहुंच रहे हैं। इस अवसर पर बद्रीनाथ विधायक लखपत बुटोला ने भी मंदिर पहुंचकर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की तथा प्रदेश की सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।
भगवान कार्तिकेय को समर्पित इस अद्वितीय मंदिर की महिमा दूर-दूर तक प्रसिद्ध है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से की गई प्रार्थना जीवन में सुख, समृद्धि और मंगल का मार्ग प्रशस्त करती है। हिमालय की गोद में आयोजित यह धार्मिक आयोजन केवल आस्था का पर्व ही नहीं, बल्कि लोक संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का विराट उत्सव भी बन चुका है।
11 दिवसीय महायज्ञ का समापन पूर्णाहुति एवं विशाल भंडारे के साथ होगा। आयोजन समिति के अनुसार अंतिम दिवस पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
