एचएनबीजीयू में कृषि-स्टार्टअप हितधारक सम्मेलन, सहयोग और साझेदारी बढ़ाने पर जोर






श्रीनगर। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय (एचएनबीजीयू), श्रीनगर में राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान (मैनेज), हैदराबाद की ओर से “कृषि-स्टार्टअप हितधारक संपर्क: सहयोग एवं साझेदारी को बढ़ावा” विषय पर महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, कृषि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, उद्यमियों तथा अन्य हितधारकों को एक साझा मंच प्रदान करना और कृषि उद्यमिता, नवाचार तथा ग्रामीण विकास के अवसरों से परिचित कराना था।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों एवं शिक्षकों ने प्रतिभाग किया। इस दौरान कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह ने की। उन्होंने विभिन्न संस्थानों एवं हितधारकों को एक मंच पर लाने में कार्यक्रम की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। अपने संबोधन में उन्होंने कृषि के महत्व और देश की अर्थव्यवस्था में इसके योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र के विकास के लिए युवाओं और विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
कुलपति ने विद्यार्थियों से कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों की पहचान कर उनमें योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने “आप दुनिया में जो बदलाव देखना चाहते हैं, उसकी शुरुआत स्वयं से करें” का संदेश देते हुए विद्यार्थियों को सकारात्मक सोच, नवाचार और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं, बिरला परिसर के निदेशक प्रो. हरिभजन सिंह चौहान ने कृषि विस्तार एवं विभिन्न संस्थानों के बीच सहयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसानों तक नई तकनीक, ज्ञान एवं नवाचार प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए मजबूत समन्वय जरूरी है।
कार्यक्रम में श्री सुभाष चंद्र नेगी, उपमहानिरीक्षक, सशस्त्र सीमा बल, श्रीनगर, डॉ. अजीत नेगी, डॉ. डी.के. राणा सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

इस अवसर पर उद्यमी गोविंद सिंह धामी ने ग्रामीण उद्यमिता और ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, स्थानीय संस्कृति, पारंपरिक उत्पाद और स्थानीय अनुभवों के प्रभावी प्रचार-प्रसार के माध्यम से युवाओं के लिए रोजगार एवं आय के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान भौगोलिक संकेतक (GI) प्राप्त उत्पादों, जैविक कृषि, जलवायु परिवर्तन, कृषि उत्पादों के भंडारण एवं प्रसंस्करण, सरकारी सहायता, किसान उद्यमिता तथा स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को अपने आसपास उपलब्ध प्राकृतिक एवं स्थानीय संसाधनों की पहचान कर उन्हें ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान और व्यावसायिक अवसरों में बदलने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम में कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े विभिन्न विषयों में साझेदारी, संस्थागत सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया। विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से कृषि उद्यमिता एवं स्टार्टअप से संबंधित विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त की और अपने विचार साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में विशिष्ट अतिथियों एवं प्रतिभागियों को सम्मानित कर स्मृति-चिह्न प्रदान किए गए। आयोजन का समापन सहयोग, नवाचार, उद्यमिता और ग्रामीण विकास के संदेश के साथ हुआ। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक ज्ञान को वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से जोड़ने तथा स्थानीय संसाधनों के उपयोग के माध्यम से कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नए उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के आयोजन के लिए डॉ. संतोष सिंह रावत ने विशेष आभार व्यक्त किया। मंच संचालन डॉ. अंकित सती, प्रतिभा रावत एवं डॉ. रमेश चंद्र नौटियाल ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ. रमेश चंद्र नौटियाल, डॉ. विवेक सिंह एवं डॉ. नासिर शाह का विशेष योगदान रहा।
