August 17, 2026

बंदरों की समस्या के निदान का वादा याद दिलाया तो पत्रकार को समझाने लगे विधायक! वादा नहीं काम होता है?

देहरादून के क्लेमेंट-टाउन क्षेत्र में बंदरों का आतंक इस कदर बड़ गया है कि, यहां आम आदमी का सड़क पर निकलना खतरे से खाली नहीं है। यहां बंदर अभी तक कई लोगों को काटकर घायल कर चुके है। और आये दिन यहां पर बंदर बच्चों व महिलाओं को काटने के लिए दौड़ते है। यह समस्या विगत कई सालों से चल रही है और साल दर साल विकट होती जा रही है। लेकिन यहां के जन प्रतिनिधियों को जैसे इस समस्या से कोई सरोकार ही नहीं है। बीते विधानसभा चुनावों को साढे़ चार साल होने वाला है। चुनावों के दौरान धर्मपुर विधान सभा के भाजपा प्रत्यासी व वर्तमान विधायक विनोद चमोली द्वारा कैंट बोर्ड स्थित सार्वजनिक भवन मंे क्षेत्र का विधायक चुनने पर सबसे पहले बंदरों के बाड़े बनाये जाने का बादा मंच से किया था,लेकिन अभी तक इस समस्या के समाधान के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया है। हिमवंत प्रदेश न्यूज द्वारा विधायक विनोद चमोली को अपना वादा याद दिलाने पर उन्होंने कहा कि “वादा नहीं हुआ करता है,बात की जाती है,चुनावों के समय हमने बात की थी समस्या तो है समाधान होना चाहिए समय-समय पर फोरस्ट को बताया जाता है,बाडे़ लगाये जाते है,कोरोना काल में नहीं लगाये जा सके हैं,हम फिर कोशिस करेंगे“।

गौरतलब है कि,उत्तराखंड के पहाड़ी व मैदानी जनपदों में जंगली जानवरों किसानों व आम आदमी का जीना दूभर कर दिया है। मैदानी क्षेत्रों में मौहल्ले व कस्बों में बंदरों का आतंक इस कदर बड़ गया है कि, यहां अकेले सड़क पर निकलना जान को जोखिम में डालने जैसा है। वही दूसरी ओर पर्वतीय जनपदों में बंदर व सुअर किसान की सालभर की मेहनत को चंद घंटों में बर्वाद कर दे रहे है। लेकिन इस ज्वलंत समस्या का यहां के जन प्रतिनिधियों कोई लेना देना नहीं है। जिससे किसानों का कृषि व वागवानी से मोह भंग हो रहा है।

-भानु प्रकाश नेगी,देहरादून

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