July 20, 2026

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना ने पकड़ी रफ्तार, चार प्रमुख स्टेशनों का निर्माण तेज

श्रीनगर/ऋषिकेश। उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित ऋषिकेश-कर्णप्रयाग ब्रॉडगेज रेल परियोजना के तहत देवप्रयाग, जनासू, मेघेथा तथा श्रीनगर (रानीहाट) रेलवे स्टेशनों के निर्माण कार्यों में तेजी आ गई है। परियोजना के अंतर्गत स्टेशन भवन, प्लेटफॉर्म, फुट ओवर ब्रिज (एफओबी), सर्कुलेटिंग एरिया और अन्य सहायक संरचनाओं का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है।

रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) के अनुसार इन स्टेशनों के निर्माण कार्य का शुभारंभ 6 मार्च 2026 को किया गया था। परियोजना के तहत स्टेशन भवनों के साथ प्लेटफॉर्म, प्लेटफॉर्म शेल्टर, फुट ओवर ब्रिज, स्टेशन परिसर की सड़कें, सर्कुलेटिंग एरिया, ओवरहेड वाटर टैंक, पंप हाउस, जल शोधन संयंत्र, दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं, पार्किंग, शौचालय तथा अन्य आवश्यक आधारभूत संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त सामान्य विद्युत कार्य भी इसी अनुबंध के अंतर्गत पूरे किए जाएंगे।

वर्तमान में जनासू, मेघेथा और श्रीनगर स्टेशनों पर निर्माण गतिविधियां तेज गति से चल रही हैं। जनासू स्टेशन पर स्टेशन भवन के लिए खुदाई का कार्य पूरा कर लिया गया है तथा प्लेटफॉर्म लेवल (पीएलटी) का निर्माण भी लगभग पूर्ण हो चुका है। वहीं मेघेथा स्टेशन पर स्टेशन भवन के लिए खुदाई का कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।

श्रीनगर (रानीहाट) स्टेशन पर ग्रामीणों की सुविधा के लिए प्रस्तावित फुट ओवर ब्रिज (Villagers’ FOB) की नींव के लिए खुदाई का कार्य जारी है। निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए साइट पर बैचिंग प्लांट स्थापित कर दिया गया है। साथ ही प्लेटफॉर्म दीवार निर्माण के लिए बड़ी संख्या में रेडीमेड पैनल उपलब्ध करा दिए गए हैं तथा रेल, सीमेंट सहित अन्य आवश्यक निर्माण सामग्री की भी नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर उच्च गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्य पूरा करने के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। परियोजना पूर्ण होने के बाद उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों को रेल संपर्क का नया विकल्प मिलेगा, जिससे स्थानीय लोगों, तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक परिवहन उपलब्ध होगा। साथ ही क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और पर्यटन विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

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