December 9, 2021

रिकॉर्ड 139 बार रक्तदान कर चुके अनिल वर्मा “शिवालिक रक्तदान सेवा अवार्ड-2021” से हुए सम्मानित

अनिल वर्मा “शिवालिक रक्तदान सेवा अवार्ड-2021” से सम्मानित

यूथ रेडक्रास कमेटी के शिविर में 104 युवाओं ने किया रक्तदान

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देहरादून। यूथ रेडक्रास कमेटी द्वारा शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में आयोजित विशेष रक्तदान शिविर तथा विचार गोष्ठी में कुल 104 यूनिट रक्त एकत्र किया गया। इस अवसर अब तक 139 बार रक्तदान कर चुके अनिल वर्मा को विशिष्ट योगदान के लिए शिवालिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग द्वारा “शिवालिक रक्तदान सेवा अवार्ड-2021” से सम्मानित किया गया।

शिविर का उद्घाटन मुख्य अतिथि राज्य रेडक्रास सोसायटी के महासचिव डॉ० एम एस अंसारी, अति विशिष्ट अतिथि भारत विकास परिषद् “द्रोण” श्री रोहित कोचगवे कार्यक्रम अध्यक्ष  शिवालिक काॅलेज ऑफ इंजीनियरिंग के प्रिंसिपल डॉ० गणेश भट्ट, शिविर, जिला रेडक्रास सोसायटी के वाईस चेयरमैन सुभाष चौहान, यूथ रेडक्रास कमेटी के चेयरमैन अनिल वर्मा, श्री महन्त इंद्रेश हाॅस्पिटल ब्लड बैंक की मेडिकल ऑफीसर  डॉ० वगीशा गर्ग , विशिष्ट अतिथि मेजर प्रेमलता वर्मा, श्रीमती पद्मिनी मल्होत्रा ,श्री विकास कुमार, श्री रोहित कोचगवे , श्रीमती अंतेजा बिष्ट तथा श्रीमती रूपाली शर्मा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित करके किया।

रक्तदाताओं को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथि डॉ० एम एस अंसारी ने कहा कि  रक्त का कृत्रिम निर्माण अभी तक संभव नहीं हो सकने तथा किसी पशु पक्षी का रक्त नहीं चढ़ाये जा सकने  के कारण केवल मानव का रक्त ही किसी जरूरतमंद की जान बचा सकता है। इसलिए रक्तदान को महादान-जीवनदान  कहा जाता है।

अति विशिष्ट अतिथि भारत विकास परिषद् ” द्रोण” के सचिव  ने कहा कि चूंकि रक्त को अधिक समय तक ब्लड बैंक में भी सुरक्षित नहीं रखा जा सकता। अत: युवाओं को  हर तीन महीने   बाद लगातार मानवीय कर्तव्य समझकर स्वैच्छिक रक्तदान करना चाहिए, ताकि ब्लड बैंकों में रक्त की उपलब्धता बनी रहे।

शिविर आयोजक तथा अब तक रिकॉर्ड 139 बार रक्तदान कर चुके डॉ० कार्ल लैंडस्टीनर अवार्डी अनिल वर्मा ने कहा कि हमारे देश में  “रक्तदान क्रांति” की आवश्यकता है। कभी – कभार रक्तदान कर लेना बड़ी बात नहीं है।रक्तदाताओं को रेगुलर ब्लड डोनर होना चाहिए। क्योंकि ब्लड बैंकों में रक्त की बहुत कमी है। आज भी दुर्घटनाओं में या प्रसव के दौरान ही अनेक व्यक्ति प्रतिदिन केवल इसलिए मौत का शिकार हो जाते हैं क्योंकि उन्हें  “वक्त पर रक्त ” नहीं मिल पाता।

हमारे देश में रक्तदान के प्रति निस्संदेह जागरूकता आई तो है परन्तु सच्चाई यह भी  है कि आज भी एक प्रतिशत से अधिक युवा रक्तदान नहीं करते। इसका सबसे बड़ा कारण यह भ्रांति है कि रक्तदान करने से शरीर में कमजोरी आ जाती है अथवा इम्यूनिटी कम हो जाती है जिससे शरीर को रोग  लग जाते हैं।

उन्होंने कहा कि जबकि सच्चाई इसके विपरीत है कि नियमित रूप से रक्तदान करते रहने से रक्तदाता को कमजोरी के बजाय  बहुत लाभ होता है।  रक्तदान करने पर बोन मैरो एक्टिवेट होने से शरीर में नये रक्त  का संचार होता है । जिससे  शरीर में रेड ब्लड सेल्स, व्हाइट ब्लड सेल्स, प्लाज्मा व प्लेटलेट्स  के गुणों में वृद्धि  होती है।

इसके अतिरिक्त शरीर से ख़राब कोलेस्ट्रॉल ” एल डी एल ” निकलकर अच्छा कोलेस्ट्रॉल “एच डी एल”  बढ़ता है। खून में आयरन का लेवल ठीक बना रहता है जिससे हार्ट अटैक की संभावना बहुत कम  रहती है। ब्लड प्रेशर कंट्रोल रहता है तथा फैट कम होने लगता है जिससे शरीर में नई स्फूर्ति आती है।

कार्यक्रम अध्यक्ष शिवालिक काॅलेज के प्रिंसिपल डॉ० गणेश भट्ट ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति तथा फास्ट फूड की लत  को भी ब्लड बैंकों में  रक्त की कमी  के लिए जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा कि विश्व में सबसे अधिक युवा जनसंख्या वाले देश में रक्त  की कमी से मौत होना शर्म‌ की बात है। ऐसे युवा स्वयं बीमार रहकर अथवा  कम हीमोग्लोबिन होते हुए दूसरों की जान क्या बचायेंगे। उन्होंने युवावर्ग को नशा त्यागकर तथा फास्ट फूड के बजाय घर में बना पौष्टिक  आहार तथा हरी सब्जियां भी  खाने की सलाह दी।

विशिष्ट अतिथि पद्मिनी मल्होत्रा ने  छात्राओं व महिलाओं  में एनीमिया  की समस्या व समाधान  पर विस्तार से बताया।  उन्होंने  स्वस्थ छात्राओं से   साल में कम से कम दो बार रक्तदान अवश्य करने की अपील करते हुए कहा कि  बड़ी संख्या में महिलाओं को प्रसव अथवा अन्य बीमारियों के कारण प्रतिदिन रक्त की आवश्यकता पड़ती है अतः यह हमारा नैतिक दायित्व है कि हम भी रक्तदान करें । एनीमिया से निबटने के लिए  महिलाओं को आवश्यक रूप से  किशोरावस्था से ही  पौष्टिक भोजन के साथ – साथ आयरन व फाॅलिक एसिड  सप्लीमेंट के रूप में लेने की सलाह दी।

विशिष्ट अतिथि मेजर प्रेमलता वर्मा ने थैलीसीमिया , हीमोफीलिया तथा सिकल सेल आदि आनुवांशिक बीमारियों की चर्चा की। थैलीसीमिया  के लिए उन्होंने माता-पिता को जिम्मेदार बताया। उन्होंने सुझाव दिया कि विवाह से पहले यदि जन्मकुंडली जांचने की बजाय  विवाह करने जा रहे लड़के-लड़की की थैलीसीमिया जांच कर ली जाये तो इस गंभीर बीमारी से निजात मिल सकती है। उन्होंने “थैलीसीमिया मुक्त भारत” अभियान चलाये जाने पर जोर दिया।

गोष्ठी में विशिष्ट अतिथियों सुभाष चौहान, वाईस चेयरमैन, कार्यकारिणी सदस्य विकास कुमार तथा अंतेजा बिष्ट ने भी अपने विचार व्यक्त किए। शिविर संचालक डॉ० अरविंद फर्स्वाण ने रक्तदान शिविर के सफल आयोजन हेतु यूथ रेडक्रास कमेटी तथा श्री महंत इंद्रेश हास्पिटल ब्लड बैंक सहित समस्त वक्ताओं एवं रक्तदाता  छात्र-छात्राओं का आभार व्यक्त किया ‌।

शिविर में महंत इंद्रेश हास्पिटल ब्लड बैंक की टीम में मेडिकल ऑफीसर डॉ०वगीशा गर्ग, समन्वयक अमित चंद्रा, टेक्नीशियन राकेश कुकरेती, सचिन सेमवाल,मीनाक्षी,नीलम,नीरज,नितेश,मोहित, विपिन,विकास सिंह, तथा जितेन्द्र पांडे सम्मिलित थे।

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