October 2, 2026

डॉ. राजेन्द्र सिंह नेगी बने कृषि एवं संबद्ध विज्ञान संकाय के पहले वरिष्ठ प्रोफेसर

गढ़वाल विश्वविद्यालय में नया इतिहास

श्रीनगर गढ़वाल। हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कृषि एवं संबद्ध विज्ञान संकाय के लिए गौरव का क्षण है। विश्वविद्यालय के ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं चौरास परिसर के निदेशक डॉ. राजेन्द्र सिंह नेगी को वरिष्ठ प्रोफेसर के पद पर पदोन्नत किया गया है। इसके साथ ही वे कृषि एवं संबद्ध विज्ञान संकाय के पहले वरिष्ठ प्रोफेसर बन गए हैं।
चमोली जनपद के गौचर निवासी डॉ. राजेन्द्र सिंह नेगी का जन्म वर्ष 1964 में हुआ था। उनकी इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय परिवार एवं क्षेत्र में खुशी का माहौल है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रकाश सिंह की अध्यक्षता में 26 मई को आयोजित शिक्षकों की पदोन्नति समिति की बैठक में उन्हें वरिष्ठ प्रोफेसर बनाए जाने का निर्णय लिया गया।
डॉ. नेगी वर्तमान में ग्रामीण प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष होने के साथ-साथ चौरास परिसर के निदेशक का दायित्व भी निभा रहे हैं। शिक्षा, शोध एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। उन्होंने अब तक 100 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं तथा कई पुस्तकों के लेखन और विभिन्न शोध परियोजनाओं के संचालन के माध्यम से अकादमिक जगत को समृद्ध किया है।
उनके निर्देशन में 10 से अधिक शोधार्थी पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं। डॉ. नेगी के प्रयासों से गढ़वाल विश्वविद्यालय में मशरूम उत्पादन एवं प्रशिक्षण केंद्र तथा स्थानीय फलों के मूल्य संवर्धन इकाई की स्थापना हुई, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं।
उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी ज्ञान के प्रसार, आजीविका विकास तथा किसानों की आय बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य किया है। विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विस्तार गतिविधियों के माध्यम से उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों के किसानों को आधुनिक तकनीकों एवं स्वदेशी ज्ञान से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके प्रयासों से अनेक किसान आर्थिक रूप से सशक्त बने हैं।
किसानों की आर्थिकी सुदृढ़ करने, सतत विकास को बढ़ावा देने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी नवाचारों को प्रोत्साहित करने के लिए किए गए कार्यों के चलते डॉ. नेगी को विभिन्न मंचों पर सम्मानित भी किया जा चुका है।
डॉ. राजेन्द्र सिंह नेगी के वरिष्ठ प्रोफेसर बनने पर विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें बधाई दी और इसे विश्वविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

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