October 16, 2026

चित में भरी अशुभ वासनाओं से मनुष्य जागृत होकर अपने आप को बचा सकता है:आचार्य ममगाई

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आत्मबोध होने पर पुण्य पाप से मुक्ति मिलती है
भगवान व्यास जी नें जन्मेजय से कहा इस जगत में जो भी मन से सोचा जाए इंद्रियों से अनुभव किया जाए वह सब नाशवान के साथ ही माया मात्र है। संसार क्या है संसार मे क्या है चित में भरी अशुभ वासनाओं से मनुष्य जागृत होकर अपने आप को बचा सकता है।

यह बात अनुसुइया माता रथ डोली मंदिर गोपेश्वर मण्डल में आयोजित श्रीमद्देवी भागवत कथा में व्यक्त करते हुए ज्योतिष्पीठ व्यास आचार्य श्री शिव प्रसाद ममगाईं जी ने कहा कि मनुष्य का अपना गुरु अंतःकरण है जिसे पूर्णतः मनुष्य स्वयं समझकर समर्थन देता है सबसे सीख लेने की आदत प्रत्येक व्यक्ति को होनीं चाहिए दत्तात्रेय संत ने 24 गुरु बनाये जो मनुष्य आसक्ति रहित हो जिसका चित परमात्मा में लगा रहता है जो द्वेत भाव मे मुक्त होकर ईर्ष्या द्वेष नही करता वह सफलता असफलता दोनों में स्थिर रहता है वह कभी दुख बन्धन में बढ़ता नही मनुष्य न हो तो पृथ्वी पर भलाई नही होगी।

भलाई को मनुष्य की चेतना ने जन्म दिया ब्रह्मा विष्णु महेश समस्त देवतागण पूरे ब्रह्मांड नायक के संकेत पर सृजन पालन संहार करते है ह्रदय में सद्गुणों का कमल खिलने पर स्वभाव रूपी लक्ष्मी का प्रवेश होता है संसार से आसक्ति मुक्ति में बाधक होती है आत्म बोध होने पर पुण्य पाप से मुक्ति मिलती है अद्वेत तत्व विशुद्ध चिन्मय आत्मा है धन से निर्धनता मिलती है व अछी सोच रखने से शांति संसार मे परमात्मा को छोड़कर सब अनित्य है। आपसी सौहार्द प्रेम सदगुण स्वाभाव रूपी सुगन्ध से सब प्राणियों का खिंचाव अपनी तरफ करना यह मनुष्य की मानवता का परिचय है आदि प्रसंगो पर भाव विभोर होते हुए विशाल जन समूह के रूप में भक्त जन कथा श्रवण करते हुए मन्त्र मुग्ध हुए।

विशेष रूप से भगत सिंह विष्ट, अध्यक्ष अनुसूइया मंदिर समिति सचिव दिगम्बर विष्ट, भास्कर सेमवाल,संजय तिवाड़ी, विनोद सेमवाल, देवेन्द्र बड़थ्वाल, प्रवीण क्रांति भट्ट, प्रभारी हिंदुस्तान शोभा भट्ट, सेमवाल राहुल विष्ट, नंदन सिंह राणा, सुनील सिंह बिष्ट, अनुसुइया मंदिर ट्रस्ट विजय सिंह विष्ट, विक्रम विष्ट, विकास विष्ट, रितिक राहुल, उमानंद सेमवाल, जय सेमवाल, विपुल राणा, अमित रावत, जगमोहन राणा, पदमेंद्र विष्ट, सुदर्शन तोपवाल विक्रम झींकवांन देवेन्द्र सिंह बर्थवाल दिनेश सेमवाल राजेन्द्र सेमवाल सतेश्वरी सेमवाल आदि भक्त गण भारी संख्या में उपस्थित थे.

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