सड़क के अभाव में आज भी जूझ रहा उमासैंण गांव, ग्रामीणों को तय करनी पड़ती है लंबी पैदल दूरी।
कर्णप्रयाग (चमोली)।
राज्य और केंद्र सरकार भले ही पर्वतीय क्षेत्रों में चहुंमुखी विकास के दावे कर रही हो, लेकिन आजादी के कई दशक बीत जाने के बाद भी कई दूरस्थ गांव मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। चमोली जनपद के कर्णप्रयाग विकासखंड की कपिरी पट्टी अंतर्गत ग्राम सभा किमोली का दूरस्थ गांव तोलियो उमासैंण आज भी सड़क सुविधा से वंचित है।
गांव तक सड़क मार्ग न होने के कारण ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कई किलोमीटर पैदल सफर तय करना पड़ता है। बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाने, बच्चों को स्कूल भेजने और आवश्यक सामान लाने-ले जाने में ग्रामीणों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को चारपाई या डंडी के सहारे मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से गांव तक मोटर मार्ग निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सड़क सुविधा के अभाव में गांव के विकास की रफ्तार भी प्रभावित हो रही है और रोजगार के अवसरों की कमी के कारण पलायन भी बढ़ रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों ने सरकार और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि जल्द से जल्द गांव तक सड़क निर्माण कराया जाए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके और गांव के विकास को गति मिल सके।
