पलायन को मात दे रहा ट्राउट पालन, ल्वाणी के युवाओं ने खड़ा किया रोजगार का मॉडल

उत्तराखंड के पर्वतीय जनपदों से युवाओं के पलायन को रोकने और उन्हें स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से विभिन्न स्वरोजगार योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं के माध्यम से अब पहाड़ के युवा स्वरोजगार अपनाकर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहे हैं।
सीमांत जनपद चमोली के विकासखंड देवाल के ल्वाणी गांव में भी ट्राउट मछली पालन रोजगार का एक बेहतर माध्यम बनकर उभर रहा है। यहां युवा किसान मोहन सिंह बिष्ट और उनकी टीम राज्य सरकार तथा मत्स्य विभाग के सहयोग से ट्राउट मछली का उत्पादन कर रही है। टीम ने 54 टैंकों में करीब 40 से 50 कुंतल ट्राउट मछली का उत्पादन किया है। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मिली आधुनिक हैचरी की मदद से टीम ने पांच लाख ट्राउट मछली के बीज का भी उत्पादन किया है। इससे कई युवाओं को स्वरोजगार के साथ ही आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।


पर्वतीय क्षेत्रों की जलवायु और ठंडे पानी को ट्राउट मछली पालन के लिए अनुकूल माना जाता है। इसी संभावना को देखते हुए मत्स्य विभाग चमोली के किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग उपलब्ध करा रहा है।
मत्स्य विभाग के सहायक निदेशक जगदम्बा प्रसाद के अनुसार, गोपेश्वर के निकट बैरागना गांव में ट्राउट मछली का बड़ा प्रजनन केंद्र स्थापित किया गया है। वहीं, देवाल विकासखंड में पहली बार तीन निजी हैचरियां स्थापित की गई हैं। इससे स्थानीय स्तर पर मछली के बीज की उपलब्धता बढ़ने के साथ ही किसानों को ट्राउट पालन के क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिल रहा है।
