देवाल का आदर्श प्राथमिक विद्यालय बना नौनिहालों की पहली पसंद, छात्र संख्या पहुँची 115।
चमोली। राज्य व केंद्र सरकार के अथक प्रयासों के बावजूद उत्तराखंड के सरकारी विद्यालयों में छात्र संख्या लगातार घटती जा रही है, जो सरकार और शिक्षा विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। वहीं, इसके उलट चमोली जनपद के दूरस्थ विकासखंड देवाल स्थित राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय देवाल एक मिसाल बनकर उभरा है, जहाँ बीते कई वर्षों से छात्र-छात्राओं की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
वर्तमान में विद्यालय में 115 नौनिहाल अध्ययनरत हैं, जो जनपद चमोली के प्राथमिक विद्यालयों में सर्वाधिक छात्र संख्या मानी जा रही है। खास बात यह है कि विद्यालय के आसपास कई निजी स्कूल होने के बावजूद यहाँ के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने अभिभावकों का विश्वास जीतने में सफलता हासिल की है।
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सुमन रानी के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा संचालित नवाचारों के माध्यम से बच्चों को आधुनिक और रुचिकर तरीके से पढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग, ग्रामीणों और शिक्षकों का इस कार्य में पूरा सहयोग मिल रहा है, जिससे विद्यालय का वातावरण निरंतर बेहतर हो रहा है।
वहीं, विद्यालय की अध्यापिका दीपा राज ने बताया कि लोगों के मन में यह भ्रांति रहती है कि सरकारी शिक्षक अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाते। उन्होंने इस धारणा को तोड़ते हुए अपने दोनों बच्चों को इसी विद्यालय में शिक्षित किया है, जिससे समाज में सकारात्मक संदेश गया है।
विद्यालय के विकास में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) गौचर की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मुख्य शिक्षा अधिकारी एवं डायट के प्राचार्य आकाश सारस्वत समय-समय पर विद्यालय का निरीक्षण करते रहते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों से डीएलएड प्रशिक्षुओं को इस विद्यालय में भेजा जा रहा है और इसे कपकोट के आदर्श विद्यालय की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है।
सरकारी स्कूलों में घटती छात्र संख्या के बीच देवाल का यह विद्यालय एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आया है, जो अन्य विद्यालयों के लिए भी मार्गदर्शक साबित हो सकता
