जीवीके परियोजना प्रभावितों के मुआवजे को लेकर यूकेडी ने खोला मोर्चा
# जीवीके परियोजना प्रभावितों के मुआवजे को लेकर यूकेडी ने खोला मोर्चा, सरस्वती देवी की गिरफ्तारी के विरोध में आंदोलन तेज करने का ऐलान
श्रीनगर गढ़वाल। अलकनंदा घाटी स्थित जीवीके जल विद्युत परियोजना से प्रभावित परिवारों को मुआवजा नहीं मिलने और उनके हक की आवाज उठाने वाली उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) की नेत्री सरस्वती देवी की गिरफ्तारी का मामला तूल पकड़ने लगा है। यूकेडी ने इस कार्रवाई पर कड़ा आक्रोश जताते हुए सरकार और जीवीके कंपनी के खिलाफ आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है।
गुरुवार को श्रीनगर गढ़वाल के एक निजी होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में यूकेडी संरक्षक एवं देवप्रयाग विधानसभा क्षेत्र से दल के अधिकृत प्रत्याशी पूरण सिंह कठैत ने कहा कि जीवीके परियोजना से प्रभावित परिवार लंबे समय से अपने अधिकारों और उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक नागरिक को अपनी जायज मांगों के समर्थन में शांतिपूर्ण आंदोलन करने का अधिकार है। ऐसे में यूकेडी नेत्री सरस्वती देवी को आंदोलन के दौरान जेल भेजना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि परियोजना प्रभावितों की समस्याओं का समाधान करना सरकार और संबंधित कंपनी की जिम्मेदारी है। विकास परियोजनाओं का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचना चाहिए, लेकिन यदि प्रभावित परिवार वर्षों तक अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहें तो ऐसे विकास की सामाजिक जवाबदेही पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
कठैत ने स्पष्ट किया कि यूकेडी प्रभावित परिवारों की आवाज दबने नहीं देगी। यदि सरकार और जीवीके कंपनी ने शीघ्र मुआवजे की मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की तो दल व्यापक आंदोलन करेगा। उन्होंने बताया कि दीपावली से पहले अथवा उसके बाद यूकेडी का सैनिक प्रकोष्ठ जीवीके कंपनी के कार्यालय पर प्रदर्शन करेगा। इसके बावजूद मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
इस दौरान यूकेडी युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय प्रवक्ता अरुण नेगी ने कहा कि सरस्वती देवी की गिरफ्तारी को दल स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि परियोजना प्रभावित लंबे समय से मुआवजे के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय आंदोलनकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। प्रभावितों के अधिकारों की आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है।
अरुण नेगी ने कहा कि उत्तराखंड की जल, जंगल और जमीन से जुड़ी परियोजनाओं में स्थानीय लोगों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। पर्वतीय क्षेत्रों के लोगों ने विकास परियोजनाओं के लिए अनेक कठिनाइयां और त्याग झेले हैं। ऐसे में प्रभावित परिवारों को उनका न्यायोचित अधिकार और मुआवजा मिलना सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
पत्रकार वार्ता के माध्यम से यूकेडी ने सरकार से जीवीके परियोजना प्रभावितों की लंबित मुआवजे संबंधी मांगों का प्राथमिकता से समाधान करने तथा सरस्वती देवी की गिरफ्तारी के मामले में उचित कार्रवाई करने की मांग की। इस अवसर पर गीता देवी, सोनू सहित यूकेडी के अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
