बद्रीनाथ में ‘देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव’, लोक संस्कृति के रंग में रंगा सीमांत क्षेत्र






चमोली के सीमांत क्षेत्र बद्रीनाथ धाम में ‘देवभूमि सांस्कृतिक महोत्सव-2026’ का आयोजन किया गया। भारतीय सेना और जिला प्रशासन चमोली की संयुक्त पहल पर ऑपरेशन सद्भावना के तहत आयोजित इस महोत्सव की थीम ‘संस्कृति हमारी विरासत, हमारा भविष्य’ रखी गई। 19 और 20 सितंबर को आयोजित महोत्सव में लोकनृत्य, लोकसंगीत, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक व्यंजनों की झलक देखने को मिली। स्कूली बच्चों और स्थानीय कलाकारों के साथ प्रदेशभर से पहुंचे कलाकारों ने गढ़वाली लोकगीत और लोकनृत्य प्रस्तुत कर समां बांध दिया। वहीं महिला स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों, किसानों और युवा उद्यमियों ने अपने उत्पादों के स्टॉल भी लगाए।
इस दौरान सेंटर कमांड अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल ए सेन गुप्ता भी मौजूद रहें उन्होंने देश के प्रथम गाँव माना में भारत के तिरंगा फहराया. स्थानीय उत्पादों
बद्रीनाथ धाम प्लाजा में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में स्कूली बच्चों ने रंगारंग प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे कलाकारों ने गढ़वाली लोकगीत और लोकसंगीत की प्रस्तुतियां देकर माहौल को पूरी तरह लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया। कार्यक्रम में स्थानीय लोगों और युवाओं ने भी उत्साह के साथ भागीदारी
महोत्सव में स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के साथ सीमांत क्षेत्रों के हुनर और उत्पादों को भी मंच दिया गया। महिला स्वयं सहायता समूहों, कारीगरों, किसानों और युवा उद्यमियों ने अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए। भारतीय सेना की ओर से विशेष प्रदर्शनी के माध्यम से सीमाओं की सुरक्षा के साथ ऑपरेशन सद्भावना के तहत किए जा रहे सामाजिक विकास कार्यों की जानकारी भी दी गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमांत क्षेत्र में इस तरह के आयोजनों से लोगों में खासा उत्साह देखने को मिलता है। इससे नई पीढ़ी को अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं को करीब से जानने का अवसर मिलता है। साथ ही स्थानीय और लोक कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए बेहतर मंच मिलता है। बाइब्रेंट विलेज योजना के तहत सीमांत गांवों में बुनियादी सुविधाओं के विकास के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
कार्यक्रम आयोजित कर रहे सैन्य अधिकारियों ने बताया कि भारतीय सेना सीमाओं की सुरक्षा के साथ देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में भी अपनी सहभागिता निभा रही है। सीमांत क्षेत्रों में ‘हमारी विरासत, हमारी संस्कृति’ की थीम पर इस तरह के आयोजन किए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्यक्रम पिछले वर्ष भी आयोजित किया गया था और इसे लगातार जारी रखने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी अपनी लोक संस्कृति और परंपराओं से जुड़ी रहे।
सीमांत क्षेत्र में आयोजित इस सांस्कृतिक महोत्सव ने जहां स्थानीय लोगों को अपनी जड़ों और संस्कृति से जोड़ा, वहीं कलाकारों, युवाओं और स्कूली बच्चों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का मंच भी दिया। महोत्सव के जरिए स्थानीय संस्कृति और उत्पादों को पहचान दिलाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्वरोजगार को बढ़ावा देने का संदेश भी दिया गया।
