October 13, 2026

भगवान कार्तिक स्वामी महायज्ञ में उमड़ा श्रद्वालुओं का सैलाब

♦संतोंष नेगी, पोखरी

भगवान कार्तिक स्वामी में 11 दिवसीय महायज्ञ में भक्तों का तांता हुआ है उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले और जनपद चमोली से सटा हुआ स्थित कार्तिक स्वामी मंदिर हिन्दुओं का एक पवित्र स्थल है, जो भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय को समर्पित है। यह मंदिर समुद्र तल से 3050 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है
मंदिर समिति के अध्यक्ष शत्रुघ्न सिंह नेगी ने बताया कार्तिक स्वामी मंदिर में प्रतिवर्ष भांति इस वर्ष भी 5 जून से महायज्ञ शुरू हो गया है।14 जून भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी, और 15जून को पूर्णाहुति के साथ समापन होगा महायज्ञ के 7वें दिन भी मन्दिर में भक्तों का तांता लगा हुआ है इस महायज्ञ में 363 गांवों रूद्रप्रयाग और जनपद चमोली के सहयोग करते हैकार्तिक पूर्णिमा और जेष्ठ माह में मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर यहां संतान के लिए दंपति दीपदान करते हैं।प्राचीन मान्यता
माना जाता है कि भगवान कार्तिकेयजी ने इस जगह अपनी अस्थियां भगवान शिव को समर्पित की थीं। प्राचीन कथा अनुसार एक दिन भगवान शिव ने गणेशजी और कार्तिकेय से कहा कि तुममें से जो ब्रह्मांड के सात चक्कर पहले लगाकर आएगा, उसकी पूजा सभी देवी-देवताओं से पहले की जाएगी। कार्तिकेय ब्रह्मांड के चक्कर लगाने के लिए निकल गए, लेकिन गणेशजी ने भगवान शिव और माता पार्वती के चक्कर लगा लिए और कहा कि मेरे लिए तो आप दोनों ही ब्रह्मांड हैं। भगवान शिव ने खुश होकर गणेशजी से कहा कि आज से तुम्हारी पूजा सबसे पहले की जाएगी। जब कार्तिकेय ब्रह्मांड का चक्कर लगाकर आए और उन्हें इन सब बातों का पता चला तो उन्होंने अपना शरीर त्यागकर अपनी अस्थियां भगवान शिव को समर्पित कर दीं।
महामंत्री बलराम सिंह नेगी ने बताया इस मंदिर में घंटी बांधने से इच्छा पूर्ण होती है। यही कारण है कि मंदिर के दूर से ही आपको यहां लगी अलग-अलग आकार की घंटियां दिखाई देने लगती हैं। यहां शाम की आरती बेहद खास होती है। इस दौरान यहां भक्तों का भारी जमावड़ा लग जाता है। कहते हैं कि महायज्ञ के दौरान कोई भी भक्त भगवान कार्तिकेय से जो कामना करता है उसके सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं

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