September 26, 2022

पर्वतीय जिलों में हिंसक जानवरों के आतंक से परेशान ग्रामीण आंदोलन की राह पर चलने को मजबूर!

वन बाहुल प्रदेश उत्तराखंड में यूं तो वन्यजीवों व मानव का संघर्ष नया नहीं है।लेकिन बीते एक दशक से अधिक समय से यहां पर मानव व वन्यजीवों का टकराव तेजी से बढ़ने लगी है। यह समस्या प्रदेश के पर्वतीय जिलों में अब विकराल रूप धारण करने लगी है ।पलायन के कारण खाली होते गांव और तेंदुआ, भालू, बाघ ,सूअर आदि जंगली जानवरों की बढ़ती तादाद मानव व पालतू जानवरों के लिए खतरा बनी हुई है।इन हिंसक जानवरों का डेरा अब मानव बस्ती के आसपास  होने से आए दिन ग्रामीण क्षेत्रों में तेंदुआ व भालू महिलाओं व बच्चों को अपना आसान शिकार बना रहे हैं। प्रदेश के कई क्षेत्रों में तेंदुए और भालू का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि,  यहां के लोगों को अपना दैनिक काम भी मौत के साये में करना पड रहा है। इस समस्या का निदान न होते देख पीड़ित ग्रामीण क्षेत्रों के लोग अब आंदोलन करने को मजबूर हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता के अनुसार 2 साल में लगभग 82 से अधिक तेंदुआ आदमखोर घोषित कर मौत के घाट उतारे जा चुके हैं। जबकि अभी तक सिर्फ लगभग 10 हिंसक तेंदुओं को ही रेडियो कॉलर लगाए गए हैं। एक तरफ वन विभाग जंगली जानवरों के सुरक्षा की बात करता है तो वही हिंसक हो चुके जानवरों को पकड़ कर उन्हें उचित स्थान पर रखने के बजाय मौत के घाट उतार देता है। जो वन विभाग की नीतियों पर प्रश्न चिन्ह लगाता है।

वही बात अगर वन विभाग की करें तो विभाग बीते एक दशक से अधिक समय से तेंदुआ, बाघों की गणना तक नहीं कर पाया है। प्रमुख वन संरक्षक राजीव भरतरी का कहना है कि, मानव और वन्यजीवों के संघर्ष को कम करने के लिए वन अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया पर जोर दिया जा रहा है। जिससे प्रदेश में वन्यजीवों को काबू में रखा जा सके।

जंगली जानवरों खासकर तेंदुआ वह भालू की धमक मानव बस्तियों में होने से पीड़ित ग्रामीणों का अब जीना मुश्किल हो गया है। जब भी तेंदुआ व भालू किसी ग्रामीण को अपना शिकार बनाता है तो वन विभाग उसे आदमखोर घोषित कर मौत के घाट उतार देता है। लेकिन इससे समस्या का निदान होते नहीं दिखाई दे रहा है। वन्यजीवों की पर्वतीय जिलों में लगातार बढ़ती तादाद को रोकने के लिए वन विभाग को इन जंगली जानवरों  की या तो नसबंदी करनी चाहिए या इन्हें ट्रंकूलाइज कर बाड़ों में रखना होगा। ताकि मानव को इन हिंसक जानवरों का शिकार ना होना पड़े।और जंगली जानवर मानव दोनों का जीवन बचा रहे।

 

-भानु प्रकाश नेगी  हिमवंत प्रदेश न्यूज़, देहरादून

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