September 26, 2022

देहरादून में मिली मां चण्डिका की सौ साल से अधिक पुरानी धरोहर

-भानु प्रकाश नेगी
देहरादूनः मॉ चण्डिका की देवरा यात्रा के देहरादून में 19 वें पढ़ाव के दौरान सौ साल से अधिक पुरानी धरोहर माता के भक्त शिवसिंह नेगी के पास सुरक्षित मिली। जहां उन्होंने अपने घर में मॉ चण्डिका के पधारने पर उन्हें सप्रेंम वापस भेंट की। इस एतिहासिक धरोहर के सुरक्षित मिलने पर दिवरा यात्रा समिति के अध्यक्ष धीर सिंह बिष्ट व महामंत्री देवेन्द्र सिंह जग्गी ने खुशी जताते हुऐ शिवसिंह नेगी के सम्पूर्ण परिजनों का आभार व धन्यवाद दिया।


दरअसल मॉ चण्डिका देवी के सुसुराल माने जाने वाले महड़ गांव जहां मॉ चण्डिका व शिव मंदिर में महड़ मल्ला गांव के मूल निवासी र्स्वागीय गब्बर सिंह नेगी ने सौ साल पहले चॉदी के दो निसान भेंट स्वरूप चडाये थे जो राजस्थानी कला से निर्मित है। बाद में जब मांॅ चण्डिका माता मंदिर से चोरी होने लगी तो उन्होंने ये दोनों चांॅदी के निसान अपने पर सुरक्षित रख दिये। लेकिन लगभग 92 साल बाद मांॅ चण्डिका की दिवरा यात्रा निकली तो तब उनके बेटे शिवसिंह ने अपनी धर्मपत्नी व पोते नागेन्द्र सिंह नेगी के साथ मिलकर मॉ चण्डिका की एतिहासिक धरोहर सप्रेंम उन्हें भेंट की। इस भंेट से मॉ चण्डिका अति प्रसन्न हई और अपने सच्चे भक्तों को भरपूर आर्शीवाद दिया।
स्वर्गीय गब्बर सिंह नेगी तत्कालीन समय के धनाड्य व्यक्ति थे जो समाजसेवा के लिए पूरे दश्ज्यूला पट्टी समेत अनेक इलाके में प्रसिद्व थे। उनके चार पुत्र अजब सिंह नेगी,दलबीर सिंह नेगी,शिवसिंह नेगी व चन्द्र सिंह नेगी है।इन चार भाईयों में अब सिर्फ शिव सिंह नेगी ही जीवित है जिन्होंने मॉ चण्डिका को उनकी पौराणिक धरोहर चॉदी के दो छडें(निसान) शिव सिंह नेगी के पुत्र योगेन्द्र सिंह नेगी व नागेन्द्र सिंह नेगी हऐ,चन्द्र सिंह नेगी के पुत्र संदीप सिंह नेगी,जगदीश सिंह नेगी,रवीन्द्र,सिंह नेगी है।

कल उत्तरकाशी विश्वनाथ मंदिर के लिए रवाना होगी मॉ चण्डिका की रथडोली

देहरादून में 21 दिन प्रवास के बाद मांॅ चण्डिका की रथडोली उत्तरकाशी स्थित विश्वनाथ मंदिर में मिलन के लिए जायेगी। जहां पूजा अर्चना के बाद श्रीनगर में मॉ चण्डिका का कुछ दिन प्रवास होगा। दिवरा यात्रा समिति के अध्यक्ष धीर सिंह बिष्ट व महासचिव देवेन्द्र सिंह जग्गी ने यह जानकारी देते हुऐ बताया कि आगे के कार्यक्रम श्रीनगर गढ़वाल में प्रवास के बाद तय किये जायेंगे। आपको बता दे कि 4 फरवरी को रूद्रप्रयाग जनपद से मां चण्डिका की देवरा यात्रा ने ऋषिकेश स्थित गढ़ी श्यामपूर में प्रवास किया हरिद्वार में हर की पैड़ी में स्नान के बाद कनखल स्थित दक्ष प्रजापति मंदिर में दर्शन व सती कुण्ड में यात्रा के बाद भक्तों के बुलावे पर सीधे देहरादून स्थित रतनपुर,मोहकमपुर,सुभाषनगर,हरभवाला,हर्बटपुर,भाउवाला,बालावाला,मोहकमपुर,तनुवाला,कारगीचौक,अल्कापुरी,वनविहार,प्रेमनगर,पित्थुवाला,ब्राहमणवाला,गणेशपुर,शमशेरगढ़,भानियावाला,व प्रवास पर रहीं है।

जहां मॉ चण्डिका के भक्तों ने स्वागत में पलक पावडें बिछाये। देहरादून में मॉ चण्डिका के प्रति लोगों की इतना अस्था व विश्वास देखने को मिली कि जिस क्षेत्र,गली,मौहल्ले में मॉ चण्डिका की रथ डोली गुजरी वहां लोगों दर्शनों के लिए नंगे पांव दौड़ पडत़े,साथ ही जहां जहां माता का प्रवास हुआ वहां भक्तों ने जमकर मॉ चण्डिका को अपनी अपनी भेंटे अर्पित की। देहरादून में मॉ चण्डिका का काई ऐसे भक्त न रहा हो जो अपने घर पर उन्हें न बुलाना चाह रहा हो लेकिन समय की सीमा को देखते हुऐ यह संभव नही था इसलिए जिस क्षेत्र में माता का प्रवास होता वहीं भक्तों ने अपनी भेंटे चडाई व मॉ चण्डिका का आर्शीवाद प्राप्त किया।

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देहरादून प्रवास के दौरान सबसे खास दिन ब्रहमगुरू हरिबल्लभ सती के मोहकमपुर स्थित घर पर रहा जहां भव्य भजन संध्या ने भक्तों में भारी उत्साह भरा। मॉ चण्डिका के देहरादून में अन्तिम प्रवास के दौरान माता की विदाई पर कई भक्त फूट फूट कर रोने लगे। भक्ति के सागर में डूबे भक्तों को माता ने अपनी बन्यात में आने का सादर निमंत्रण भी दिया है।

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