August 12, 2022

भगवती मोहजनित माया को हर लेती है :आचार्य ममगाई

भगवती मोहजनित माया हर लेती है भक्तों की
मायेश्वरी ही चिद ब्रह्म स्वरुपिणी भुवनेशी कही गयी हैं क्योंकि वे बड़ी दयालु हैं भक्तो को अपनी अनुभूति प्रदान करके वे उनकी मोहजनित माया हर लेती हैं यह भुवन ही माया है उसकी स्वामिनी के कारण ही वह भुवनेशी या जगजननी कहि जाती हैं जो त्रैलोक्य सुंदरी है इसलिए उस रूप में सर्वदा जो आसक्त चित रहता है उसे सांसारिक माया नही रहती है।


यह बात अनसूया रथ डोली माता मंदिर गोपेश्वर मण्डल में चल रही श्रीमद्देवी भागवत कथा में व्यक्त करते हुए ज्योतिष्पीठ ब्यास आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं ने कहा कि मोह माया को दूर करके केवल उसी भगवती का ध्यान पूजन करना चाहिए।

अन्यान्य देवताओं का नही क्योंकि उस सच्चिदानंद स्वरुपिणी भगवती के अलावा कोई अन्य देवता तमोराशी अज्ञानान्धकार को दूर नही कर सकता इसे यूं समझना चाहिए कि अंधकार से अंधकार नही मिटता, उसके लिए प्रकाश चाहिए वह मायेश्वरी भगवती ही अपनी अद्भुत प्रभा से माया व अंधकार को दूर कर सकती है।

कृष्ण शब्द की व्याख्या करते हुए आचार्य ममगाईं  ने कहा कि जिनके नयन शरत्कालीन मध्यह्न में विकसित कमलों की शोभा को मानो छीन से रहे हैं इनकी दशनवाली मोतियों की शोभा को तुच्छ कर रही है। मुकुट में मोर पंख शोभा दे रहा है, मालती की मंजुल माला से ये अनुपम शोभा पा रहे हैं। इनकी नासिका अतीव सुंदर है ये अत्यंत मनोहर प्रभु भक्तों पर अनुग्रह करने के लिए पधारते हैं। जिनका स्वरूप मुख मण्डल प्रज्वलित अग्नि के समान विशुद्ध पीताम्बर से देदीप्यमान हो रहा है रत्नजड़ित आभूषणों से इनकी दोनों भुजायें विभूषित हो रही हैं जिनके हाथ मे बांसुरी सुशोभित हो रही है। सबके आधार सबके स्वामी व सर्व शक्तियों से युक्त सर्वान्तर्यामी व्यापक पूर्ण पुरूष हैं सम्पूर्ण ऐश्वर्य प्रदान करना इनका स्वभाव सिद्ध अधिकार है ये परम् मंगलमय एवम वैष्णवों के आधार एवम कृपा के भंडार हैं ऐसे परिपूर्ण ब्रह्म को जिन्हें सिद्ध सिद्धेश सिद्धिकारक एवम सनातन महापुरुष कहा जाता है वैष्णव जन निरन्तर जिनका अपने ह्रदय में ध्यान करते हैं।

इनकी कृपा दृष्टि से जन्म म्रत्यु जरा व्याधि शोक और भय सभी प्रभाव हीन हो जाते हैं ब्रह्मा की आयु इनके निमेष तुल्य है वही यह आत्म परब्रह्म परमात्मा कृष्ण नाम से विख्यात है कृष्ण शब्द की व्युत्पत्ति इस प्रकार है। ‘कृषि’ न तद्भक्तिपरक है और ‘न’ तददास्य वाचक है अतः प्रभु भक्ति व प्रभु दासता देने की योग्यता जिनमे है वही कृष्ण हैं।

वहीं प्रधान आचार्य डाॅ प्रदीप सेमवाल  नें सप्तशती एवं बेद म॔त्रोच्चारण कै साथ आज तक लगभग 80,000 आहुतियां दी उन्होंने कहा 12 जून 11 बजे जल यात्रा होगी। सभी लोग अधिक संख्या में सम्मिलित होयें और धर्म लाभ उठायें। कार्यक्रम में गौचर जोशीमठ, चमोली, छिलका, घिंगराण, नन्दप्रयाग, कर्णप्रयाग, गोपीनाथ मोहल्ले आदि स्थानो से हजारों भक्त देवी भागवत कथा में  पंहुचे।

 

13 जून को पूर्ण आहुति होगी विद्वान ब्राह्मण और अन्य सामाजिक   सहभागीता निभा रहे हैं।
इस अवसर पर विशेष रूप से पूर्व बद्रीनाथ विधायक  महेंद्र भट्ट, हरि प्रसाद सती, भोला दत्त सती, प्रचार्य संस्कृत महाविद्यालय अनुसूया रथ डोली यात्रा अध्यक्ष भगत सिंह विष्ट अनुसुइया मंदिर समिति दिगम्बर विष्ट सचिव संजय तिवाड़ी विनोद सेमवाल नंदन सिंह राणा विक्रम विष्ट विपुल राणा जगमोहन राणा देवेन्द्र सिंघ राजेन्द्र सेमवाल सतेश्वरी देवी दिनेश सेमवाल उमानन्द सेमवाल आचार्य जगदीश पन्त सरोजनी पंथ आदि भक्त गण भारी संख्या में उपस्थित थे!!!

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