November 29, 2022

समस्त संस्कारों को भारत देश मे जन्म मिला है ।आचार्य ममगाई

भारत देश मे सभी संस्कार उतपन्न हुए हैं ।देवी के स्वरूपो को कहीं राधा कही सीता कही सरस्वती कही लक्ष्मी के रूप में पूजा जाता है ।वह प्रकृति नित्य मानी गयी है। उक्त विचार ज्योतिष्पीठ व्यास आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं जी ने प्रेमनगर श्यामपुर देहरादून में चल रही श्रीमद्देवी भगवत के समापन दिवस पर व्यक्त करते हुए कहा कि परमात्मा की शास्वत लीला है ।

अग्नि में जलाने की शक्ति चंद्रमा व कमल में कमनीयता शोभा शक्ति सुर्य में प्रभात शक्ति रहती है। वैसे यह प्रकृति परमात्मा में नित्य विराजमान रहती है ।जैसे स्वर्णकार सोने के बिना आभूषण कुमार मिट्टी के बिना वर्तन नही बना सकता वैसे परमात्मा भी सृष्टि के निदान कारण है ।शक्ति सब्द में दो शब्द है । ऐश्वर्य वाचक अक्ति पराक्रम वाचक है ।जिस प्रकति में वाक चातुर्य व पराक्रम दोनों ही विद्यमान है। उसे शक्ति कहते हैं।

उसीतरह भगवती में भी दो शब्द है। भग का मतलब ऐश्वर्य वति का मतलब षड ऐश्वर्य है। अतः ज्ञान समृद्धि यश बल से परिपूर्ण होने के कारण प्रकृति देबी ही भगवती शक्ति है ।उस शक्ति से युक्त होने के कारण परमात्मा भी भगवान कहलाता है। ये सर्व तन्त्र स्वतंत्र होते हुए आत्मप्रभु साकार व निराकार भी है। इनका निराकार भी परम् तेजमय है योगी परुष सदा उसी तेजमय पुरुष का ध्यान करते हैं। और कहते हैं। कि परमात्मा सर्वत्र ईश्वर व आनंद स्वरूप है। उस अवस्था मे प्रकृति पुरुष का सम्बंध रहता है। इसलिए वह सत चित आनंदमय है ।अदृश्य है। किंतु सभी को दिखती है। इसी कारण यह सर्व स्वरूप है ।ये ब्रह्म ओंकार के मध्य भाग में विराजते हैं गौ के सुशोभित उस गो लोक में भी श्रीकृष्ण भगवान की अज्ञानुसार ब्रह्म आदि देवता राधा की पूजा करने लगे तत्पश्चात सुयघ राजा ने उस राधा देवी का पूजन किया भगवान शंकर के आदेश से सबने राधा की उपासना करी अनेक कलाओं से राधा व शक्ति की जो कलाएं उतपन्न हुई उनकी भारतवर्ष में पूजा हुई और होनी भी चाहिए ।

तभी से घर घर मे देवी के स्वरूपो की पूजा हुई आदि प्रसंगों पर श्रोता भाव विभोर हुए आज विशेस रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कई पदाधिकारी पूर्व प्राचार्य आचार्य नथी लाल भट्ट जी आचार्य संदीप बहुगुणा आचार्य हर्षमणी घिल्डियाल आचार्य द्वारिका नौटियाल आचार्य चन्द्र मोहन थपलियाल सुरेश जोशी वहीं पूजा में पद्मा वर्तवाल लक्षण सिंह वर्तवाल भरतसिंह वर्तवाल सुदर्शन सिंह राणा केशर सिंह भण्डारी जीतपाल सिंह नेगी हुक्म सिंह विष्ट ताजवर सिंह वासकण्डी विनित भण्डारी सुमन बासकंङी सरोज चंद्रकला शशी शांती आदि भारी संख्या में क्षेत्रीय लोग सम्मिलित थे ।।

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